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Guru Pradosh Vrat | गुरु प्रदोष व्रत से कौन-से ग्रह दोष होते हैं दूर? | PDF

Depiction of Lord Shiva, revered as the supreme deity and lord of the universe in Indian culture.

प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। यह व्रत प्रत्येक मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत गुरुवार को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत गुरु ग्रह और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अति शुभ माना गया है।

प्रदोष व्रत कब पड़ रहा है?

मई के महीने में हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह का कृष्ण पक्ष चल रहा है। कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 मई 2026 (गुरुवार) को सुबह 11:20 बजे से शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानि 15 मई 2026 को सुबह 08:31 बजे तक रहेगी।

गुरु प्रदोष व्रत की विधि

1. व्रत का संकल्प:

व्रत करने वाले को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

2. पूजा स्थल की तैयारी:

पूजा के लिए साफ स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3. पूजन सामग्री:

4. भगवान शिव की पूजा:

5. गुरु ग्रह की पूजा:

6. रात्रि जागरण और शिव भजन:

शाम के समय शिवजी की पुनः आरती करें और रात्रि में शिव भजनों का गायन करें।

7. अगले दिन व्रत का पारण:

अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाकर और दान देकर व्रत का पारण करें।

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

  1. गुरु ग्रह की शांति: यह व्रत उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह अशुभ स्थिति में है।
  2. ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति: गुरुवार भगवान विष्णु और बृहस्पति ग्रह का दिन है। इस दिन प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि और धार्मिकता प्राप्त होती है।
  3. धन और समृद्धि: व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
  4. शिव और विष्णु की कृपा: इस व्रत के माध्यम से भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
  5. पारिवारिक शांति: यह व्रत वैवाहिक जीवन में शांति और प्रेम लाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

गुरु प्रदोष व्रत का फल

विशेष टिप्स:

गुरु प्रदोष व्रत भक्तों को उनके जीवन में शुभ फल और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होती हैं।

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