हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि अत्यंत शुभ और पुण्यदायिनी मानी जाती है, विशेष कर मार्गशीर्ष पूर्णिमा का अत्यधिक महत्व है। इस दिन स्नान-दान करना बेहद फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस पवित्र तिथि पर तीर्थों में स्नान, गाय-दान, अन्न-दान, वस्त्र-दान और गरीबों को भोजन कराने से पापों का नाश होता है और सौभाग्य, धन-संपदा तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यता:
भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में उल्लेख है कि इस दिन किया गया दान अनंत गुना फल देकर मोक्ष की प्राप्ति कराता है।
पूजा-विधि
- प्रातःकाल पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान
- सूर्यदेव को अर्घ्य
- भगवान श्री विष्णु, श्री दत्तात्रेय का पूजन
- गरीबों को भोजन व दान
श्री दत्तात्रेय प्रकट्योत्सव : त्रिदेव अवतार का प्रागट्य दिवस
मार्गशीर्ष पूर्णिमा को भगवान श्री दत्तात्रेय का प्रकट्योत्सव मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार दत्तात्रेय ने पृथ्वी पर अवतार लिया था। दत्तात्रेय को ज्ञानयोग, भक्ति, वैराग्य, योग शक्ति और गुरु-तत्व का प्रतीक माना जाता है।
दत्तात्रेय पूजा-विधि
- गायत्री मंत्र व दत्त मंत्र (“ॐ श्री दत्ताय नमः”) का जाप
- घी का दीपक, चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी से पूजा
- गऊ-सेवा व साधुओं की सेवा
पूजन का महत्व
- जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं
- मानसिक संतुलन और ज्ञान की प्राप्ति
- रोग-शोक, आर्थिक कठिनाइयाँ और ग्रह दोष शांत होते हैं
- गुरु कृपा की प्राप्ति
इस दिन दान के विशेष लाभ
| दान | लाभ |
|---|---|
| अन्न-दान | परिवार में सुख-समृद्धि |
| वस्त्र-दान | दरिद्रता का नाश |
| जल/गौ-दान | रोग एवं कष्टों से मुक्ति |
| दीपदान | घर में सकारात्मक ऊर्जा |
इस स्नान दान पूर्णिमा एवं दत्तात्रेय प्रकट्योत्सव पर सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
भगवान दत्तात्रेय सबके जीवन में शांति, समृद्धि और ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ।