Forth Sawan Somvar 2025
धार्मिक महत्व:
सावन मास के चौथे सोमवार का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है और भक्तगण इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल, 2025 में, चौथा सावन सोमवार 4 अगस्त को है। चौथे सोमवार को किए गए उपासना और व्रत का फल विशेष रूप से विवाहित जीवन की खुशियों और समृद्धि के लिए माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का भी विशेष महत्व है।यह दिन भगवान शिव के तांडव नृत्य का प्रतीक है, जो ब्रह्मांड के विनाश और पुनर्निर्माण का प्रतिनिधित्व करता है।इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से विनाशकारी शक्तियों से मुक्ति, सृजनात्मकता और नई शुरुआत की प्राप्ति होती है।
क्यों मनाया जाता है:
चौथे सोमवार को मनाने का कारण यह है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और सामंजस्य बना रहता है। यह दिन विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि वे अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत और पूजा करती हैं।
क्या है इसकी विशेषता:
चौथे सोमवार की खासियत यह है कि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की पूजा भी की जाती है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली और समृद्धि चाहते हैं। इस दिन की गई पूजा-अर्चना से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
पूजा विधि:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- दीप, अगरबत्ती और धूप जलाएं।
- भगवान शिव और माता पार्वती को फल, फूल, बेलपत्र और मिठाई अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” या “गौरी शंकरार्पणमस्तु” मंत्र का जाप करें।
- दिन भर व्रत रखें और सात्विक भोजन करें।
- शाम को फिर से पूजा करें और आरती गाएं।
- रात्रि में कथा सुनें या भगवान शिव के भजनों का गायन करें।
ईश्वर को प्रसन्न करने के सरल उपाय:
भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए इस दिन भक्तों को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें। भगवान शिव और माता पार्वती के नाम का जाप करें और उनके मंत्रों का उच्चारण करें।
क्यों रखते हैं व्रत सावन में:
सावन मास में व्रत रखने का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर वास करते हैं और उनकी उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। व्रत रखने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक शुद्धि भी होती है और व्यक्ति का आत्मिक बल बढ़ता है। सावन के सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
इस दिन क्या करें:
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर जाकर पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें। महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें।
इस दिन क्या न करें:
इस दिन किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार मन में न लाएं। असत्य बोलने और अनैतिक कार्यों से बचें। व्रत के दौरान अन्न का सेवन न करें और सादा भोजन करें। परिवार के सदस्यों से विवाद करने से बचें और दिनभर शांति और सकारात्मकता बनाए रखें।