शुक्ल पक्ष सप्तमी 2025 शुभ मुहूर्त
गुरुवार, 27 नवंबर 2025
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सप्तमी तिथि प्रारंभ: 27 नवंबर 2025, रात 12:01 बजे
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सप्तमी तिथि समाप्त: 28 नवंबर 2025, रात 12:29 बजे
पूजा का श्रेष्ठ समय: सूर्य उदय के समय पूजा और अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
यह दिन भगवान विष्णु एवं सूर्य देव की उपासना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
शुक्ल पक्ष सप्तमी का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि भगवान विष्णु और सूर्य देव को समर्पित मानी जाती है। इस दिन व्रत व पूजा करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और सौभाग्य, स्वास्थ्य व समृद्धि प्राप्त होती है।
इस दिन को अचल सप्तमी, रथ सप्तमी और सूर्य जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
इस व्रत से:
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मन की शांति और मानसिक बल प्राप्त होता है
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रोग और कष्टों का नाश होता है
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पापों से मुक्ति मिलती है
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घर में सुख-समृद्धि आती है
शुक्ल पक्ष सप्तमी व्रत एवं पूजा विधि
पूजा सामग्री
दीपक, गंगाजल, अक्षत (चावल), तिल, पीले पुष्प, तुलसी पत्र, फल, गुड़, तिल के लड्डू, कलश, पीला वस्त्र, भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र, सूर्य अष्टकम
पूजा विधि
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प्रातः Brahma Muhurta में स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
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भगवान विष्णु और सूर्य देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
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घर के मंदिर या पूजा स्थल में दीपक जलाएँ।
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गंगाजल से कलश स्थापित करें और आचमन कर शुद्धिकरण करें।
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भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी पत्र अर्पित करें।
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सूर्य देव को जल में लाल फूल और तिल डालकर अर्घ्य दें।
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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तथा ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।
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व्रत कथा सुनें और आरती करें।
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शाम को फलाहार लेकर व्रत पूर्ण करें।
शुक्ल पक्ष सप्तमी व्रत कथा
पुराणों में उल्लेख है कि एक राजा अपने जीवन में अनेक कष्टों से परेशान था। ऋषियों के आदेश पर उसने शुक्ल पक्ष की सप्तमी का व्रत किया और सूर्य देव की आराधना की। व्रत के प्रभाव से उसके सभी दोष नष्ट हो गए और जीवन में समृद्धि आई। तभी से यह व्रत पापों का नाश करने और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है।
व्रत करने के लाभ
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धन, वैभव और उन्नति की प्राप्ति
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मनोकामनाओं की पूर्ति
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संतान सुख प्राप्त होता है
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नकारात्मक ऊर्जा का नाश
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स्वास्थ्य और दीर्घायु
महत्वपूर्ण मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
“ॐ घृणि सूर्याय नमः”
27 नवंबर 2025 की शुक्ल पक्ष सप्तमी पूजा और व्रत करने से अपार पुण्य फल प्राप्त होता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया यह व्रत जीवन में खुशहाली, सफलता और सूर्य देव तथा भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्रदान करता है।