Press ESC to close

VedicPrayersVedicPrayers Ancient Vedic Mantras and Rituals

Shrimad Bhagavad Gita Chapter–2 Shalok–35 | श्रीमद् भगवदगीता अध्याय दो–श्लोक पैंतीस | PDF

अध्याय 2 – सांख्य योग

श्लोक 35

भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः ।
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ॥ 35॥

सरल हिंदी में भावार्थ

हे अर्जुन!
महावीर योद्धा (महारथी) यह समझेंगे कि तुम युद्धभूमि से भय के कारण पीछे हट गए। जिनके बीच तुम अत्यंत सम्मानित थे, उन्हीं योद्धाओं की दृष्टि में तुम नगण्य तथा तुच्छ समझे जाओगे।

विस्तृत व्याख्या

इस श्लोक में कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि कर्तव्य से पीछे हटना केवल आत्मग्लानि नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी पतन का कारण बनता है।

1. महान व्यक्तियों की दृष्टि में गिरावट

यहाँ बताया गया है कि युद्धभूमि में निर्णय केवल व्यक्तिगत साहस का नहीं होता।
महारथी जैसे ज्ञानी व वीर लोग, जो किसी के चरित्र को गहराई से समझते हैं, यदि वे भी किसी को कायर समझने लगें, तो उसका सम्मान स्वतः गिर जाता है।

2. जिनके बीच सम्मान पाया, वही सम्मान खोना

अर्जुन उन योद्धाओं के बीच अत्यंत मान्य और प्रशंसित थे।
उनके लिए यह और भी अधिक कष्टप्रद होता कि जिनसे उन्होंने सम्मान पाया, वही उन्हें तुच्छ समझने लगें।

3. भय-आधारित निर्णय—चरित्र पर आघात

यह श्लोक यह स्पष्ट करता है कि भय से प्रेरित निर्णय व्यक्तित्व की नींव को कमजोर करते हैं।
कायरता का आभास, चाहे वास्तविकता कुछ भी हो, समाज में गहरी छाप छोड़ता है।

मुख्य बिंदु

  • सम्मान की हानि – भय के कारण पीछे हटना वीरों की दृष्टि में सम्मान घटा देता है।
  • चरित्र की परीक्षा – कठिन समय में लिया गया निर्णय व्यक्ति के वास्तविक साहस को दर्शाता है।
  • प्रतिष्ठा का मूल्य – जो व्यक्ति आदरणीय रहे हों, उनके लिए समाज में तुच्छ समझा जाना अत्यंत पीड़ादायक है।
  • कर्तव्य से पलायन का प्रभाव – यह केवल बाहरी नहीं, आंतरिक आत्मसम्मान को भी आहत करता है।

गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ

  • जीवन में भय के कारण कर्तव्य से हटना आत्मा की शक्ति को कम करता है।
  • भय—एक मानसिक विकार है—जो व्यक्ति को उसकी आध्यात्मिक क्षमता से दूर कर देता है।
  • सच्चा साधक कठिन परिस्थिति में दृढ़ रहता है; यही गुण अंततः आत्मोत्थान का मार्ग खोलता है।
  • आत्मसम्मान की रक्षा वही कर सकता है जो सत्य, साहस और धर्म पर अडिग रहे।

पदों का भावार्थ

  • भयात् – भय के कारण
  • रणात् उपरतं – युद्ध से हट जाना
  • मंस्यन्ते – समझेंगे, विचार करेंगे
  • महारथाः – महान योद्धा
  • बहुमतः – अत्यंत सम्मानित
  • लाघवम् – हीनता, तुच्छता

श्लोक का संदेश

युद्ध केवल हथियारों का नहीं, मान-सम्मान और चरित्र की दृढ़ता का भी होता है।
भय से पीछे हटना वीर पुरुष के लिए सबसे बड़ा दोष माना जाता है।
जीवन के कठिन क्षणों में धैर्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा ही सम्मान को सुरक्षित रखते हैं।

Join Our Community: YouTube | Instagram | Twitter | WhatsApp

Stay Connected with Faith & Scriptures

"*" आवश्यक फ़ील्ड इंगित करता है

यह फ़ील्ड सत्यापन उद्देश्यों के लिए है और इसे अपरिवर्तित छोड़ दिया जाना चाहिए।
declaration*