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विक्रम संवत क्या है?
विक्रम संवत हिन्दू पंचांग है जो चंद्रमा और सूर्य की चाल पर आधारित होता है। इसका उपयोग त्यौहार, व्रत, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों का समय तय करने के लिए किया जाता है। यह भारतीय पारंपरिक कालगणना प्रणाली है, जिसकी शुरुआत 57 ईसा पूर्व मानी जाती है और इसे प्राचीन सम्राट विक्रमादित्य के नाम से जोड़ा जाता है।
विक्रम संवत में वर्ष की शुरुआत प्रायः चैत्र मास से होती है और प्रत्येक माह को शुक्ल पक्ष (जब चंद्रमा बढ़ता है) तथा कृष्ण पक्ष (जब चंद्रमा घटता है) में विभाजित किया जाता है। इस पंचांग के आधार पर अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, प्रदोष जैसे महत्वपूर्ण व्रत एवं तिथियाँ निर्धारित होती हैं।
यह केवल धार्मिक तिथियों का निर्धारण ही नहीं करता, बल्कि ऋतु परिवर्तन, कृषि कार्य, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक उत्सवों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भारत और नेपाल में आज भी धार्मिक एवं पारंपरिक आयोजनों के लिए विक्रम संवत का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
विक्रम संवत का परिचय
विक्रम संवत भारतीय पौराणिक कालगणना प्रणाली है। इसे राजा विक्रमादित्य के नाम पर रखा गया था। यह 57 ईसा पूर्व से शुरू होती है।
- ग्रीगोरी कैलेंडर (साधारण हमारी आधुनिक तिथि) से लगभग 56–57 वर्ष आगे होता है।
- भारत और नेपाल में प्रमुख रूप से इसका उपयोग होता है।
- विक्रम संवत वर्ष की शुरुआत आम तौर पर चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) से होती है।
विक्रम संवत 2083–2084 (2026–2027 AD)
| मास (Month) | अवधि (Approx Gregorian Dates) | प्रमुख त्यौहार / व्रत |
| चैत्र | 7 मार्च 2026 – 5 अप्रैल 2026 | चैत्री पूर्णिमा, राम नवमी |
| वैशाख | 6 अप्रैल 2026 – 5 मई 2026 | वैशाखी, बुद्ध पूर्णिमा |
| ज्येष्ठ | 6 मई 2026 – 4 जून 2026 | गुरु पूर्णिमा, नाग पंचमी |
| आषाढ़ | 5 जून 2026 – 4 जुलाई 2026 | आषाढ़ कृष्णाष्टमी |
| श्रावण | 5 जुलाई 2026 – 4 अगस्त 2026 | सावन सोमवार, रक्षाबंधन |
| भाद्रपद | 5 अगस्त 2026 – 3 सितंबर 2026 | गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी |
| आश्विन | 4 सितंबर 2026 – 3 अक्टूबर 2026 | नवरात्रि, विजयादशमी |
| कार्तिक | 4 अक्टूबर 2026 – 2 नवंबर 2026 | करवा चौथ, दीपावली |
| मार्गशीर्ष | 3 नवंबर 2026 – 2 दिसंबर 2026 | आदित्य नवमी |
| पौष | 3 दिसंबर 2026 – 1 जनवरी 2027 | मकर संक्रांति, पुष्य नक्षत्र व्रत |
| माघ | 2 जनवरी 2027 – 31 जनवरी 2027 | माघ पूर्णिमा, श्रीकृष्ण जयंती |
| फाल्गुन | 1 फरवरी 2027 – 2 मार्च 2027 | फाल्गुन अमावस्या, होली |
मुख्य विशेषताएँ
- संवत प्रारंभ – 57 ईसा पूर्व।
- चैत्र मास से वर्ष की शुरुआत – ग्रेगोरी कैलेंडर में मार्च-अप्रैल।
- महत्वपूर्ण व्रत एवं त्यौहार – राम नवमी, सावन सोमवार, नवरात्रि, दीपावली, होली आदि।
महीने कैसे चलते हैं?
हर हिन्दू महीने में लगभग 30 दिन होते हैं और उसे दो भागों में बांटा जाता है:
- शुक्ल पक्ष – लगभग 15 दिन
- अमावस्या के बाद शुरू होता है
- चंद्रमा बढ़ता है
- अधिकतर शुभ कार्य इसी समय किए जाते हैं
- कृष्ण पक्ष – लगभग 15 दिन
- पूर्णिमा के बाद शुरू होता है
- चंद्रमा घटता है
- बड़े और नए काम करने से बचा जाता है
क्यों कहते हैं “अभी चांद चल रहा है, शुभ काम कर लो”?
जब शुक्ल पक्ष चलता है, तब चंद्रमा बढ़ रहा होता है
परंपरा के अनुसार:
- ऊर्जा और सकारात्मकता बढ़ती है
- इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार जैसे शुभ काम किए जाते हैं
जब कृष्ण पक्ष चलता है:
- चंद्रमा घटता है
- इसलिए बड़े और नए काम कम किए जाते हैं
- साधना, पूजा और व्रत अधिक किए जाते हैं
महत्वपूर्ण तिथियां और व्रत
1. अमावस्या
- इस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता
- पितृ तर्पण, दान और पूजा के लिए अच्छा माना जाता है
- विवाह, गृह प्रवेश और नया व्यापार शुरू करने से बचा जाता है
2. पूर्णिमा
- चंद्रमा पूर्ण होता है
- पूजा, व्रत, दान और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ
3. एकादशी
- हर महीने दो बार आती है
- इस दिन व्रत रखा जाता है
- इसे शरीर और मन की शुद्धि के लिए अच्छा माना जाता है
4. प्रदोष व्रत
- हर महीने दो बार आता है
- भगवान शिव की पूजा का विशेष दिन माना जाता है
विक्रम संवत 2083–2084: शुभ-अशुभ महीनों की जानकारी
| मास (Month) | प्रमुख विशेषता | शुभ कार्य | अशुभ कार्य |
| चैत्र (7 मार्च – 5 अप्रैल 2026) | वर्ष की शुरुआत, वसंत ऋतु | गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार शुरू, धार्मिक कार्य | लंबी यात्रा, मुकदमे, नई नौकरी शुरू करना अशुभ |
| वैशाख (6 अप्रैल – 5 मई 2026) | गर्मी शुरू, सूर्य की शक्ति बढ़ती | खेती-बाड़ी, धन निवेश, व्यापार विस्तार | नया घर बनाना, लंबी यात्रा, सर्जरी अशुभ |
| ज्येष्ठ (6 मई – 4 जून 2026) | गर्मी का महीना | धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा कार्य, शुभ निवेश | विवाह, गृह प्रवेश, लंबी यात्रा अशुभ |
| आषाढ़ (5 जून – 4 जुलाई 2026) | वर्षा ऋतु, सावन आरंभ | साधना, धार्मिक यात्रा, धन निवेश | शादी, बड़े समारोह, नया व्यापार शुरू करना अशुभ |
| श्रावण (5 जुलाई – 4 अगस्त 2026) | सावन, भगवान शिव मास | व्रत, पूजा, विवाह, धार्मिक कार्य | लंबी यात्रा, नए घर में प्रवेश (अमावस्या पर) अशुभ |
| भाद्रपद (5 अगस्त – 3 सितंबर 2026) | नवरात्रि, शरद ऋतु शुरू | विवाह, नए कारोबार, यात्रा, धार्मिक कार्य | व्रत विहीन दिन नए काम करना अशुभ |
| आश्विन (4 सितंबर – 3 अक्टूबर 2026) | नवरात्रि, विजयादशमी | शुभ गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार, पूजा | बीमारी या सर्जरी के लिए शुभ नहीं |
| कार्तिक (4 अक्टूबर – 2 नवंबर 2026) | दीपावली, ठंडी शुरुआत | पूजा, दीपदान, धार्मिक यात्रा | नया व्यापार शुरू करना (अमावस्या), लंबी यात्रा अशुभ |
| मार्गशीर्ष (3 नवंबर – 2 दिसंबर 2026) | मकर संक्रांति करीब | कृषि, शिक्षा, धार्मिक कार्य | विवाह और बड़े समारोह अशुभ |
| पौष (3 दिसंबर – 1 जनवरी 2027) | ठंड शुरू | साधना, व्रत, धार्मिक कार्य | लंबी यात्रा, नए काम प्रारंभ करना अशुभ |
| माघ (2 जनवरी – 31 जनवरी 2027) | माघ पूर्णिमा | विवाह, धार्मिक यात्रा, पूजा | नए व्यापार या निवेश अशुभ |
| फाल्गुन (1 फरवरी – 2 मार्च 2027) | होली माह | विवाह, गृह प्रवेश, धार्मिक कार्य | अमावस्या का दिन, नए काम प्रारंभ करना अशुभ |
मुख्य बातें
- शुभ कार्यों में – विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार शुरू करना, पूजा, धार्मिक अनुष्ठान।
- अशुभ कार्यों में – लंबी यात्रा, नए घर में प्रवेश, नए व्यापार शुरू करना (विशेषकर अमावस्या या अत्यधिक गर्म/ठंडे महीने)।
- सावन और नवरात्रि मास – विशेष रूप से पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए सर्वोत्तम।
- अमावस्या और अत्यधिक गर्मी/ठंड वाले दिन – नए काम करने के लिए अशुभ।
विक्रम संवत केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, मौसम और जीवनशैली से जुड़ा हुआ कैलेंडर है। शुक्ल पक्ष में शुभ कार्य और कृष्ण पक्ष में पूजा-साधना की परंपरा इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए मानी जाती है।



