
रंग तेरस क्या है?
रंग तेरस, जिसे रंग त्रयोदशी भी कहा जाता है, होली के बाद मनाया जाने वाला एक पारंपरिक और सांस्कृतिक उत्सव है। यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (तेरस) को मनाया जाता है।
कई स्थानों पर इसे होली के रंगों के समापन और उत्सव की निरंतरता के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग फिर से एक-दूसरे को गुलाल लगाकर खुशियां मनाते हैं और आपसी प्रेम व भाईचारे का संदेश देते हैं।
रंग तेरस 2026: तिथि और समय
वर्ष 2026 में रंग तेरस (रंग त्रयोदशी) मंगलवार, 17 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यह होली के बाद आने वाला एक प्रमुख त्योहार है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा, दान और सामाजिक उत्सव करना विशेष फलदायी माना जाता है।
रंग तेरस का इतिहास
रंग तेरस का इतिहास भारतीय लोक परंपराओं और होली उत्सव से जुड़ा हुआ है। प्राचीन समय में होली का उत्सव केवल एक दिन का नहीं बल्कि कई दिनों तक चलने वाला पर्व होता था।
होली के बाद भी कई दिनों तक गांवों और शहरों में उत्सव का माहौल बना रहता था। इसी परंपरा के अंतर्गत चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को लोग दोबारा रंगों के साथ मिलकर खुशियां मनाते थे, जिसे बाद में रंग तेरस कहा जाने लगा।
यह पर्व विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक मेल-मिलाप और उत्सव का प्रतीक माना जाता है।
रंग तेरस से जुड़ी पौराणिक कथा
रंग तेरस को भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की होली परंपरा से भी जोड़ा जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन में गोपियों और राधा रानी के साथ कई दिनों तक रंगों की होली खेलते थे। इस उत्सव में प्रेम, आनंद और भक्ति का अद्भुत संगम होता था।
इसी परंपरा की स्मृति में लोग होली के बाद भी कुछ दिनों तक रंगों का उत्सव मनाते हैं, जिसे कई स्थानों पर रंग तेरस के रूप में जाना जाता है।
रंग तेरस क्यों मनाई जाती है?
रंग तेरस मनाने के पीछे कई धार्मिक और सामाजिक कारण बताए जाते हैं।
मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- होली के उत्सव को आगे बढ़ाने के लिए
- समाज में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए
- भगवान श्रीकृष्ण की होली परंपरा को याद करने के लिए
- लोगों के बीच मेल-मिलाप और खुशियां बांटने के लिए
इस दिन लोग पुराने मतभेद भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और उत्सव का आनंद लेते हैं।
रंग तेरस कैसे मनाई जाती है?
रंग तेरस का पर्व कई स्थानों पर बड़े उत्साह और आनंद के साथ मनाया जाता है।
इस दिन लोग निम्नलिखित तरीके से उत्सव मनाते हैं:
- दोस्तों और परिवार के साथ गुलाल खेलना
- मंदिरों में पूजा और भजन-कीर्तन करना
- सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोक नृत्य आयोजित करना
- मिठाइयां और पारंपरिक व्यंजन बनाना
- एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना
इस प्रकार यह दिन लोगों को आपसी प्रेम और खुशियों से जोड़ता है।
प्राकृतिक रंगों का महत्व
रंग तेरस और होली जैसे त्योहारों में प्राकृतिक रंगों का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
रासायनिक रंग त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं, जबकि प्राकृतिक रंग फूलों, हल्दी, चंदन और हर्बल चीजों से बनाए जाते हैं।
ये रंग न केवल सुरक्षित होते हैं बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते।
रंग तेरस का संदेश
रंग तेरस का त्योहार हमें प्रेम, सद्भाव और खुशी का संदेश देता है। यह पर्व लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने और रिश्तों में मिठास बढ़ाने का अवसर देता है।
जब हम इस त्योहार को सकारात्मक भावना और सुरक्षित तरीके से मनाते हैं, तो यह समाज में खुशियों और एकता का वातावरण बनाता है।
रंग तेरस होली के उत्सव से जुड़ा एक सुंदर और पारंपरिक पर्व है। यह दिन रंगों, खुशियों और सामाजिक मेल-मिलाप का प्रतीक है।
यदि हम इस त्योहार को प्राकृतिक रंगों और प्रेम के साथ मनाएं, तो यह न केवल आनंददायक होगा बल्कि समाज में भाईचारे और सकारात्मकता को भी बढ़ावा देगा।



