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Saptami Shradh | सप्तमी श्राद्ध | PDF

Saptami Shradh

5 अक्टूबर 2023 सप्तमी श्राद्ध-

सप्तमी श्राद्ध तिथि 5 अक्टूबर 2023 को सुबह 05:41 बजे शुरू होगी और अगले दिन 6 अक्टूबर 2023 को सुबह 06:34 बजे तक रहेगी।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सप्तमी श्राद्ध पितृ पक्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को किया जाता है।

पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा है। इस दिन छह वेदियों पर पिंडदान किया जाता है। ये 6 वेदियां हैं अगस्त, क्रौंच, मातंग, चंद्र और कार्तिक। धार्मिक मान्यता है कि सप्तमी तिथि पर इन छह वेदियों पर पिंडदान करने से पितरों को शांति मिलती है। गीता में आत्मा की अमरता का उल्लेख है। तदनुसार, आत्मा ईश्वर से जुड़ने तक विभिन्न अवतारों में भटकती रहती है। इस अवस्था को अगम कहा जाता है। आगम में श्राद्ध से ही आत्मा संतुष्ट होती है। इसलिए खास है श्राद्ध सप्तमी।

सप्तमी श्राद्ध कैसे करें

पौराणिक मान्यता के अनुसार सप्तमी श्राद्ध के दिन सात ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के पुरूषोत्तम रूप की पूजा की जाती है। इस दिन गीता के सातवें अध्याय का पाठ भी किया जाता है। इसके अलावा इस दिन पितृ मंत्र का जाप करना चाहिए।

ॐ अध्या श्रुतिस्मृति प्रणुकेत, ​​इस संसार के समस्त सुख-समृद्धि प्राप्त करने तथा संतान की संख्या बढ़ाने के लिए आपको देवताओं तथा मनुष्यों के लिए भी ऐसा ही करना चाहिए।

कैसे करें पिंडदान?

पके हुए चावल में गाय का दूध, घी, ब्राउन शुगर और शहद मिलाकर एक गोला बना लें। इसे पूर्वजों के पिंड का प्रतीक माना जाता है। फिर सफेद फूल, कुश, जौ और काले तिल मिलाकर पिंड पर चढ़ाएं।

सप्तमी श्राद्ध के दिन यदि कोई आपके घर आकर कुछ मांगता है तो उसे कभी खाली हाथ न लौटाएं। इस दिन आपके पूर्वज किसी भी रूप में आपके द्वार पर आ सकते हैं। इस दिन घर आए किसी भी व्यक्ति का अनादर न करें।

पंचबली भोग

श्राद्ध के दौरान पंचबली भोग का विशेष महत्व होता है। ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले हमेशा पंचबली भोग लगाएं। इसमें गाय, कुत्ते, कौवे, देवताओं और चींटियों के लिए भोजन शामिल है।

क्या करें:

  • पितृ तर्पण: सप्तमी श्राद्ध के दिन अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए जल और तिल अर्पित करके तर्पण करें।
  • दान: अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अनाज, फल, दूध, दही, घी, गेहूं, चावल और अन्य खाद्य सामग्री का दान करें।
  • पितृ पूजा: पितृ पूजा के लिए किसी ऐसे पुजारी को आमंत्रित करें जो श्राद्ध करने की विधि और मंत्र जानता हो।
  • भगवान विष्णु की पूजा: सप्तमी श्राद्ध के दिन भगवान विष्णु की पूजा करना भी महत्वपूर्ण है।
  • दान: सामाजिक कार्यों या गरीबों को दिया गया दान भी पुण्यकारी होता है।

आप क्या नहीं कर सकते:

  • अमांसी भोजन: सप्तमी श्राद्ध के दिन अमांसी भोजन नहीं करना चाहिए। इस दिन केवल सात्विक भोजन का सेवन करें।
  • शराब या तंबाकू: पितृ श्राद्ध के दौरान शराब या तंबाकू का सेवन न करें क्योंकि इन्हें अशुद्धियां माना जाता है।
  • नए कपड़े पहनें: नए कपड़े न पहनें, साधारण कपड़े पहनें।
  • श्राद्ध के दिन व्यापार: सप्तमी श्राद्ध के दिन व्यापार या व्यवसाय न करें और अपने पूर्वजों की स्मृति पर विशेष ध्यान दें। 
  • अन्य शुभ कार्यों: इस दिन अन्य शुभ कार्यों में शामिल न हों और अपने पूर्वजों की स्मृतियों पर विशेष ध्यान दें।
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