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Shri Chandra Dev Aarti | श्री चंद्रदेव की आरती | PDF

चंद्रदेव की पूजा भारतीय धर्म और संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। उन्हें मन और भावनाओं का अधिपति माना गया है। चंद्रमा न केवल आकाशीय ग्रहों में एक प्रमुख स्थान रखता है, बल्कि वह मानव जीवन को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी प्रभावित करता है।

चंद्रदेव को समर्पित आरती “ॐ जय सोम देवा” न केवल भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी है। यह आरती भक्तों को भगवान चंद्रदेव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का एक प्रभावशाली माध्यम प्रदान करती है।

चंद्रदेव की आरती का महत्त्व 

  1. चंद्रदेव की पूजा का धार्मिक आधार:
    चंद्रदेव, नवग्रहों में प्रमुख स्थान रखते हैं। वैदिक शास्त्रों में चंद्रमा को मन का अधिपति और शीतलता का प्रतीक माना गया है। उनकी आराधना से मन को शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।
  2. मन और भावनाओं पर नियंत्रण:
    चंद्रमा का सीधा संबंध मन और भावनाओं से होता है। चंद्रदेव की आरती करने से मानसिक तनाव, चिंता, और अस्थिरता दूर होती है।
  3. शीतलता और संतुलन:
    चंद्रमा जल का कारक है। उनकी पूजा से जीवन में शीतलता, धैर्य, और संतुलन बना रहता है। यह जीवन में शांति और समृद्धि लाने का माध्यम है।
  4. शुभता और सौभाग्य:
    चंद्रदेव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में शुभता और सौभाग्य आता है। उनकी आराधना से ग्रह दोषों का निवारण होता है।
  5. धन, वैभव और समृद्धि:
    चंद्रदेव को लक्ष्मी का सहायक भी माना गया है। उनकी पूजा से धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

चंद्रदेव की आरती के लाभ 

  1. मानसिक शांति:
    चंद्रदेव की आरती से मन को शांति मिलती है। यह चिंता, तनाव, और मन की अस्थिरता को दूर करता है।
  2. ग्रह दोषों का निवारण:
    कुंडली में चंद्रमा के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए चंद्रदेव की आराधना और आरती अत्यंत प्रभावशाली है।
  3. स्वास्थ्य लाभ:
    चंद्रमा शरीर के जल तत्व और मन से संबंधित है। उनकी आराधना से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  4. सकारात्मक ऊर्जा:
    आरती से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई प्रेरणा आती है।
  5. धन और समृद्धि:
    चंद्रदेव की कृपा से धन, संपत्ति, और समृद्धि प्राप्त होती है।
  6. शीतलता और धैर्य:
    चंद्रदेव की पूजा से जीवन में शीतलता और धैर्य बढ़ता है, जिससे व्यक्ति सही निर्णय ले पाता है।
  7. भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं:
    प्रेम और श्रद्धा से आरती गाने वाले भक्तों की सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं।
  8. दुखों का नाश और सुख की प्राप्ति:
    चंद्रदेव की आराधना से जीवन के कष्ट समाप्त होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

विशेष:

  • चंद्रदेव की आरती सोमवार के दिन विशेष रूप से करनी चाहिए।
  • आरती के समय चंद्रमा को अर्घ्य देना और सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
  • जिनका चंद्रमा कमजोर है, उन्हें नियमित रूप से इस आरती का पाठ करना चाहिए।

चंद्रदेव की आरती जीवन में शांति, स्थिरता, और समृद्धि लाने का एक प्रभावी साधन है। यह मन और आत्मा को शुद्ध करती है और जीवन में शुभता और सुख प्रदान करती है।

|| ॐ जय सोम देवा आरती ||

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनंदकारी।

अर्थ: हे चंद्रदेव, आपकी जय हो! आप दुखों को हरने वाले और सुख प्रदान करने वाले हैं। आप आनंद देने वाले स्वामी हैं।

रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी।

अर्थ: आपका रजत (चाँदी का) सिंहासन चमकता है, और आपकी ज्योति अद्भुत है। आप दीनों के दयालु और कृपा के भंडार हैं। आप जन्म-मृत्यु के बंधनों को हरने वाले हैं।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।

अर्थ: जो भी आपकी आरती प्रेमपूर्वक गाता है, उसके सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। आप निर्गुण (असीम) सुख के भंडार हैं।

योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा।

अर्थ: योगीजन अपने हृदय में आपका ध्यान करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, और महादेव जैसे देवता तथा संतजन आपकी सेवा करते हैं।

वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।

अर्थ: वेद और पुराण आपकी महिमा का बखान करते हैं। आप सभी पापों और भय को हरने वाले हैं। सभी स्त्रियाँ प्रेमभाव से आपकी पूजा करती हैं।

शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहज सो पावे।

अर्थ: आप शरण में आने वालों के रक्षक हैं और भक्तों के हितकारी हैं। आपकी कृपा से भक्त धन, संपत्ति, और वैभव सहजता से प्राप्त करते हैं।

विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।

अर्थ: आप सम्पूर्ण चराचर (जगत के सभी जीवों) के रक्षक हैं। आप अविनाशी ईश्वर हैं। संसार के सभी नर-नारी आपकी पूजा और आराधना करते हैं।

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनंदकारी।

अर्थ: हे चंद्रदेव, आपकी जय हो! आप दुखों को हरने वाले और सुख देने वाले हैं। आप आनंद देने वाले देव हैं।

यह आरती चंद्रदेव की महिमा का गुणगान करती है, जो भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि, और आध्यात्मिक आनंद प्रदान करते हैं। इसे श्रद्धा और प्रेम से गाने पर भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

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