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Annapurna Stotram: संपूर्ण पाठ, अर्थ और महत्व | PDF

  • Stotra
  • मार्च 27, 2026

अन्नपूर्णा स्तोत्र माँ अन्नपूर्णा देवी की स्तुति में रचित एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। माँ अन्नपूर्णा को अन्न, धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से काशी (वाराणसी) में पूजित माँ अन्नपूर्णा की महिमा का वर्णन करता है।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।

अन्नपूर्णा स्तोत्र (श्लोक सहित हिंदी अर्थ)

श्लोक 1

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरि।
निर्धूताखिलघोरपापनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी॥
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ अन्नपूर्णा! आप सदा आनंद देने वाली, वरदान और निर्भयता प्रदान करने वाली तथा सौंदर्य की खान हैं। आप सभी पापों का नाश करने वाली और भगवान शिव की प्रत्यक्ष शक्ति हैं। हिमालय वंश को पवित्र करने वाली और काशी की अधीश्वरी माँ! मुझे कृपा का सहारा देते हुए भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 2

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी।
मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी॥
काश्मीरा गरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ! आप अनेक रत्नों और आभूषणों से सुसज्जित हैं, स्वर्ण वस्त्र धारण करती हैं। आपके वक्षस्थल पर मोतियों की माला सुशोभित है। कश्मीरी सुगंध से सुगंधित आपके अंग अत्यंत मनमोहक हैं। हे काशी की अधीश्वरी! मुझे कृपा का सहारा देते हुए भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 3

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मैकनिष्ठाकरी।
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी॥
सर्वैश्वर्यकरी तपःफलकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ! आप योग से आनंद देने वाली, शत्रुओं का नाश करने वाली और धर्म में स्थिरता प्रदान करने वाली हैं। सूर्य, चंद्र और अग्नि के समान तेजस्वी होकर तीनों लोकों की रक्षा करती हैं। आप सभी ऐश्वर्य और तप का फल देने वाली हैं। हे काशी की अधीश्वरी! मुझे कृपा का सहारा देकर भिक्षा दें।

श्लोक 4

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमाशङ्करी।
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओंकारबीजाक्षरी॥
मोक्षद्वारकवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ! आप कैलाश पर्वत की गुफाओं में निवास करने वाली, गौरी और उमा रूप में शिव की अर्धांगिनी हैं। आप वेदों के अर्थ को समझाने वाली और ओंकार स्वरूप हैं। मोक्ष के द्वार खोलने वाली काशी की अधीश्वरी! मुझे कृपा का सहारा देकर भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 5

दृश्यादृश्यविभूतिपावनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी।
लीलानाटकसूत्रखेलनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी॥
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ! आप दृश्य और अदृश्य सभी शक्तियों को पवित्र करने वाली हैं और पूरे ब्रह्मांड को अपने अंदर धारण करती हैं। आप अपनी लीला से संसार का संचालन करती हैं और ज्ञान का दीप प्रज्वलित करती हैं। भगवान विश्वेश्वर को प्रसन्न करने वाली काशी की अधीश्वरी! मुझे कृपा का सहारा देकर भिक्षा दें।

श्लोक 6

उर्वी सर्वजनेश्वरी जयकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।
वेणीनीलसमानकुन्तलहरी नित्यन्नदानेश्वरी॥
सर्वानन्दकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ अन्नपूर्णा! आप पृथ्वी पर सभी प्राणियों की स्वामिनी और विजय देने वाली हैं। आपके केश काले और सुंदर हैं, और आप सदा अन्नदान करने वाली हैं। आप सभी को आनंद और शुभ फल देने वाली काशी की अधीश्वरी हैं। कृपया मुझे भी अपनी कृपा का सहारा देकर भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 7

आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी।
काश्मीरात्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरी॥
कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:

हे माँ अन्नपूर्णा! आप आदि से अंत तक सम्पूर्ण सृष्टि का वर्णन करने वाली हैं और भगवान शिव के तीनों स्वरूपों (सृजन, पालन और संहार) को धारण करने वाली हैं। आप कश्मीर प्रदेश में भी पूजित हैं और तीनों लोकों में अपनी दिव्य तरंगों से व्याप्त रहती हैं।

आप सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली और जनकल्याण करने वाली हैं। हे काशी की अधीश्वरी माँ! कृपा का सहारा देकर मुझे भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 8

देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी।
वामे स्वादुपयोधराप्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी॥
भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ! आप विविध रत्नों से सुसज्जित, दक्ष प्रजापति की पुत्री और अत्यंत सुंदर हैं। आप अपने वाम भाग में स्थित होकर शिव को प्रिय हैं और सौभाग्य प्रदान करने वाली हैं।
आप भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण करने वाली और सदा शुभ फल देने वाली काशी की अधीश्वरी हैं। हे माँ अन्नपूर्णा! कृपा का सहारा देकर मुझे भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 9

चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी।
चन्द्रार्काग्निसमानकुण्डलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी॥
मालापुस्तकपाशसाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ! आपका तेज करोड़ों सूर्य, चंद्र और अग्नि के समान है। आप चंद्रमा के समान शीतल और तेजस्वी मुख वाली हैं। आपके कुंडल सूर्य, चंद्र और अग्नि के समान चमकते हैं।
आप हाथों में माला, पुस्तक, पाश और अंकुश धारण करती हैं। हे काशी की अधीश्वरी! कृपा का सहारा देकर मुझे भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 10

क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी।
साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरश्रीधरी॥
दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी।
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ:
हे माँ! आप भक्तों की रक्षा करने वाली, महान भय को दूर करने वाली और कृपा की सागर हैं। आप सीधे मोक्ष प्रदान करने वाली और सदैव कल्याण करने वाली हैं।
आप भगवान विश्वेश्वर (शिव) की महिमा को धारण करने वाली हैं और सभी रोगों तथा कष्टों को दूर करने वाली हैं। हे काशी की अधीश्वरी! कृपा का सहारा देकर मुझे भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 11

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥

अर्थ:
हे माँ अन्नपूर्णा! आप सदा पूर्ण रहने वाली और भगवान शंकर की प्रिय हैं।
हे पार्वती! मुझे ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति के लिए भिक्षा प्रदान करें।

श्लोक 12

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्॥

अर्थ:
मेरी माता पार्वती देवी हैं, और पिता भगवान महेश्वर (शिव) हैं।
शिव भक्त मेरे बंधु हैं और तीनों लोक ही मेरा देश है।

अन्नपूर्णा स्तोत्र का महत्व

अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में धन, अन्न और समृद्धि की कभी कमी नहीं होती। यह स्तोत्र केवल भौतिक समृद्धि ही नहीं बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है।

माँ अन्नपूर्णा की कृपा से जीवन में संतोष, करुणा और दान की भावना बढ़ती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जो आर्थिक समस्याओं या अन्न की कमी से जूझ रहे हैं।

माँ अन्नपूर्णा की कृपा पाने के लिए इस दिन करें पूजा

अन्नपूर्णा जयंती आमतौर पर मार्गशीर्ष (अगहन) मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है।

इसके अलावा:

  • कई लोग हर दिन भी माँ अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं, खासकर भोजन बनाने से पहले।
  • नवरात्रि के दौरान भी माँ दुर्गा के रूप में अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है।
  • दीपावली के बाद आने वाली अन्नकूट (गोवर्धन पूजा) के दिन भी अन्नपूर्णा माता की आराधना का विशेष महत्व होता है।

मान्यता है कि माँ अन्नपूर्णा की पूजा करने से घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।

पाठ करने के लाभ

नियमित रूप से अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है।

भक्तों का विश्वास है कि माँ अन्नपूर्णा की कृपा से कभी भी भोजन की कमी नहीं होती और जीवन में स्थिरता आती है।

अन्नपूर्णा स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य स्तुति है, जो माँ अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम है। यदि इसे श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

माँ अन्नपूर्णा से प्रार्थना है कि वे सभी भक्तों के जीवन को अन्न, धन और आनंद से पूर्ण करें।

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