
ॐ
श्री परमात्मने नमः
॥ अथ श्री शिवसहस्रनामस्तोत्रम् ॥
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् ।
विमुच्यते नमस्तस्मै शिवाय प्रभविष्णवे ।
अर्थ – जिनके स्मरण करने मात्र से मनुष्य जन्म-मृत्यु रूप संसार बन्धन से मुक्त हो जाता है, समस्त सृष्टि के कारणभूत उन भगवान शिव को नमस्कार है।
नमः समस्तभूतानामादिभूताय भूभृते ।
अनेकरूपरूपाय शिवाय प्रभविष्णवे ।
अर्थ – सम्पूर्ण प्राणियों के आदि कारण, जगत को धारण करने वाले, अनेक रूप धारण करने वाले और सर्वशक्तिमान भगवान शिव को प्रणाम है।
श्लोक 1
शिवो हरः मृडो रुद्रः पुष्करः पुष्पलोचनः ।
अर्थिगम्यः सदाचारः शर्वः शम्भुर्महेश्वरः ॥
1.शिवः – कल्याणस्वरूप 2. हरः – पाप और दुःख हरने वाले 3. मृडः – सुख और कृपा देने वाले 4. रुद्रः – संहारकर्ता एवं दुःखनाशक 5. पुष्करः – पोषण करने वाले 6. पुष्पलोचनः – कमल जैसे नेत्र वाले 7. अर्थिगम्यः – भक्तों को सहज प्राप्त 8. सदाचारः – उत्तम आचरण वाले 9. शर्वः – संहार करने वाले 10. शम्भुः – आनंद देने वाले 11. महेश्वरः – महान ईश्वर
श्लोक 2
चन्द्रपीडश्चन्द्रमौलिर्विश्वं विश्वम्भरेश्वरः ।
वेदान्तसारसंदोहः कपाली नीललोहितः ॥
12.चन्द्रपीडः – चंद्र को धारण करने वाले 13. चन्द्रमौलिः – मस्तक पर चंद्रधारी 14. विश्वम् – सम्पूर्ण जगत स्वरूप 15. विश्वम्भरेश्वरः – जगत का पालनकर्ता 16. वेदान्तसारसंदोहः – वेदान्त का सार 17. कपाली – कपाल धारण करने वाले 18. नीललोहितः – नीले और लाल आभा वाले
श्लोक 3
ध्यानाधारोऽपरिच्छेद्यो गौरीभर्ता गणेश्वरः ।
अष्टमूर्तिर्विश्वमूर्तिस्त्रिवर्गः स्वर्गसाधनः ॥
19.ध्यानाधारः – ध्यान का आधार 20. अपरिच्छेद्यः – असीम, अपरिमित 21. गौरीभर्ता – माता पार्वती के पति 22. गणेश्वरः – गणों के स्वामी 23. अष्टमूर्तिः – आठ रूपों में प्रकट 24. विश्वमूर्तिः – विश्वरूप 25. त्रिवर्गः – धर्म, अर्थ, काम के दाता 26. स्वर्गसाधनः – स्वर्ग की प्राप्ति कराने वाले
श्लोक 4
ज्ञानगम्यो दृढप्रज्ञो देवदेवस्त्रिलोचनः ।
वामदेवो महादेवः पतिः सर्वस्य भूतिनः ॥
27.ज्ञानगम्यः – ज्ञान द्वारा प्राप्त होने वाले 28. दृढप्रज्ञः – अटल बुद्धि वाले 29. देवदेवः – देवताओं के भी देव 30. त्रिलोचनः – तीन नेत्रों वाले 31. वामदेवः – कोमल एवं मंगलमय रूप 32. महादेवः – महान देव 33. पतिः सर्वस्य भूतिनः – समस्त प्राणियों के स्वामी
श्लोक 5
भूतभव्यभवन्नाथः प्रभुः भूतिभूषणः ।
भूतात्मा भूतभावनः ॥
34.भूतभव्यभवन्नाथः – भूत, भविष्य और वर्तमान के स्वामी 35. प्रभुः – सर्वशक्तिमान स्वामी 36. भूतिभूषणः – विभूति (भस्म) से अलंकृत 37. भूतात्मा – समस्त प्राणियों में स्थित आत्मा 38. भूतभावनः – सबका पालन करने वाले
श्लोक 6
शर्वः शर्वरीनाथः शूलपाणिः पिनाकधृत् ।
उग्रः पशुपतिः स्थाणुः महायोगी महातपाः ॥
39.शर्वः – संहार करने वाले 40. शर्वरीनाथः – रात्रि के स्वामी 41. शूलपाणिः – त्रिशूल धारण करने वाले 42. पिनाकधृत् – पिनाक धनुष के धारक 43. उग्रः – प्रचंड रूप वाले 44. पशुपतिः – समस्त जीवों के स्वामी 45. स्थाणुः – अचल, अडिग 46. महायोगी – महान योगी 47. महातपाः – महान तपस्वी
श्लोक 7
भीमः परशुहस्तश्च मृगव्याधो जटाधरः ।
कैलासवासी कवची कठोरः त्रिपुरान्तकः ॥
48.भीमः – अत्यंत भयानक एवं शक्तिशाली 49. परशुहस्तः – हाथ में परशु (फरसा) धारण करने वाले 50. मृगव्याधः – मृग के शिकारी रूप 51. जटाधरः – जटाएँ धारण करने वाले 52. कैलासवासी – कैलास पर्वत में निवास करने वाले 53. कवची – कवचधारी 54. कठोरः – कठोर तपस्वी 55. त्रिपुरान्तकः – त्रिपुरासुर का संहार करने वाले
श्लोक 8
वृषाङ्को वृषभारूढो भस्मोद्धूलितविग्रहः ।
सामप्रियः स्वरमयः त्रयीमूर्ति रनीश्वरः ॥
56.वृषाङ्कः – ध्वज पर वृषभ चिह्न वाले 57. वृषभारूढः – नंदी (वृषभ) पर आरूढ़ 58. भस्मोद्धूलितविग्रहः – भस्म से अलंकृत शरीर 59. सामप्रियः – सामवेद प्रिय 60. स्वरमयः – स्वरूप से ही नादमय 61. त्रयीमूर्तिः – तीन वेदों के स्वरूप 62. रणीश्वरः – युद्ध के स्वामी
श्लोक 9
सर्वज्ञः परमात्मा च सोमसूर्याग्निलोचनः ।
हविर्यज्ञमयः सोमः पञ्चवक्त्रः सदाशिवः ॥
63.सर्वज्ञः – सब कुछ जानने वाले 64. परमात्मा – परम आत्मा 65. सोमसूर्याग्निलोचनः – चंद्र, सूर्य और अग्नि नेत्र वाले 66. हविर्यज्ञमयः – यज्ञ स्वरूप 67. सोमः – अमृतमय, शीतल 68. पञ्चवक्त्रः – पाँच मुख वाले 69. सदाशिवः – सदा कल्याणस्वरूप
श्लोक 10
विश्वेश्वरो वीरभद्रः गणनाथः प्रजापतिः ।
हिरण्यरेता दुर्धर्षो गिरीशो गिरिशोत्तमः ॥
70.विश्वेश्वरः – सम्पूर्ण विश्व के ईश्वर 71. वीरभद्रः – वीर रूपधारी 72. गणनाथः – गणों के स्वामी 73. प्रजापतिः – समस्त प्रजा के पालक 74. हिरण्यरेता: – स्वर्ण तेजस्वी बीज वाले 75. दुर्धर्षः – जिन्हें जीतना कठिन है 76. गिरीशः – पर्वतों के स्वामी 77. गिरिशोत्तमः – श्रेष्ठ गिरिश
श्लोक 11
श्रीकण्ठः शितिकण्ठश्च कपर्दी नीललोहितः ।
मृडो रुद्रो पशुपतिः शम्भुः चन्द्रशेखरः ॥
78.श्रीकण्ठः – मंगलमय कंठ वाले 79. शितिकण्ठः – विषधारण से श्वेत/नील कंठ वाले 80. कपर्दी – जटाधारी 81. नीललोहितः – नील एवं लाल आभा वाले 82. मृडः – सुख प्रदान करने वाले 83. रुद्रः – दुःख हरने वाले 84. पशुपतिः – जीवों के स्वामी 85. शम्भुः – कल्याण देने वाले 86. चन्द्रशेखरः – मस्तक पर चन्द्र धारण करने वाले
श्लोक 12
त्रिनेत्रः शूलपाणिश्च पिनाकी परमेश्वरः ।
उमापतिः महेशानो भक्तवत्सल ईश्वरः ॥
87.त्रिनेत्रः – तीन नेत्रों वाले 88. शूलपाणिः – त्रिशूलधारी 89. पिनाकी – पिनाक धनुषधारी 90. परमेश्वरः – सर्वोच्च ईश्वर 91. उमापतिः – माता उमा के पति 92. महेशानः – महान ईश्वर 93. भक्तवत्सलः – भक्तों से प्रेम करने वाले 94. ईश्वरः – सर्वाधिपति
श्लोक 13
कालकालः कृत्तिवासाः कृपालुर्वेदवित् प्रभुः ।
वेदाङ्गो वेदवित् श्रेष्ठो वेदगर्भः सनातनः ॥
95.कालकालः – काल के भी काल 96. कृत्तिवासाः – गजचर्म धारण करने वाले 97. कृपालुः – दयालु 98. वेदवित् – वेदों के ज्ञाता 99. प्रभुः – सर्वसमर्थ स्वामी 100. वेदाङ्गः – वेदों के अंगस्वरूप 101. वेदवित् श्रेष्ठः – श्रेष्ठ वेदज्ञ 102. वेदगर्भः – वेदों को धारण करने वाले 103. सनातनः – आदि-अनादि
श्लोक 14
धूर्जटिर्धरणीधरः योगी योगविदां वरः ।
योगेश्वरः महायोगी योगात्मा योगनायकः ॥
104.धूर्जटिः – जटाओं में गंगा धारण करने वाले 105. धरणीधरः – पृथ्वी को धारण करने वाले 106. योगी – योग में स्थित 107. योगविदां वरः – योगियों में श्रेष्ठ 108. योगेश्वरः – योग के ईश्वर 109. महायोगी – महान योगी 110. योगात्मा – योगस्वरूप 111. योगनायकः – योग के नेता
श्लोक 15
भस्मप्रियः भस्मशायी भस्मोद्धूलितविग्रहः ।
भूतनाथः महादेवो लोकनाथः जगद्गुरुः ॥
112.भस्मप्रियः – भस्म प्रिय रखने वाले, 113. भस्मशायी – भस्म में शयन करने वाले, 114. भस्मोद्धूलितविग्रहः – भस्म से विभूषित, 115. भूतनाथः – प्राणियों के स्वामी, 116. महादेवः – महान देव, 117. लोकनाथः – लोकों के स्वामी, 118. जगद्गुरुः – समस्त जगत के गुरु
श्लोक 16
त्र्यम्बको देवदेवेशः सर्वलोकमहेश्वरः ।
हरः शम्भुः शंकरश्च शिवः शर्वः सदाशिवः ॥
119.त्र्यम्बकः – तीन नेत्रों वाले, 120. देवदेवेशः – देवों के ईश्वर, 121. सर्वलोकमहेश्वरः – सभी लोकों के महेश्वर, 122. हरः – पाप एवं दुःख हरने वाले, 123. शम्भुः – कल्याणदाता, 124. शंकरः – कल्याण करने वाले, 125. शिवः – मंगलस्वरूप, 126. शर्वः – संहारकर्ता, 127. सदाशिवः – नित्य कल्याणस्वरूप
श्लोक 17
विश्वात्मा विश्वभर्ता च विश्वकर्ता विश्वरूपधृत् ।
विश्वेशो विश्वनाथश्च विश्वाधारो जगत्पतिः ॥
128.विश्वात्मा – समस्त विश्व की आत्मा, 129. विश्वभर्ता – विश्व का पालनकर्ता, 130. विश्वकर्ता – सृष्टि के कर्ता, 131. विश्वरूपधृत् – विश्वरूप धारण करने वाले, 132. विश्वेशः – विश्व के ईश्वर, 133. विश्वनाथः – विश्व के स्वामी, 134. विश्वाधारः – विश्व का आधार, 135. जगत्पतिः – जगत के स्वामी
श्लोक 18
अजः अनादिः अनन्तश्च अव्यक्तो व्यक्तरूपधृत् ।
नित्यः शुद्धः बुद्धरूपो मुक्तिदः मोक्षदायकः ॥
136.अजः – जन्मरहित, 137. अनादिः – जिनका कोई आदि नहीं, 138. अनन्तः – अनंत स्वरूप, 139. अव्यक्तः – अप्रकट, 140. व्यक्तरूपधृत् – प्रकट रूप धारण करने वाले, 141. नित्यः – सदा रहने वाले, 142. शुद्धः – पवित्र, 143. बुद्धरूपः – ज्ञानस्वरूप, 144. मुक्तिदः – मुक्ति देने वाले, 145. मोक्षदायकः – मोक्ष प्रदान करने वाले
श्लोक 19
ईशानः सर्वविद्यानाम् ईश्वरः सर्वभूतानाम् ।
ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदा शिवः ॥
146.ईशानः – समस्त विद्याओं के स्वामी, 147. ईश्वरः – सभी प्राणियों के ईश्वर, 148. ब्रह्माधिपतिः – ब्रह्मा के अधिपति, 149. ब्रह्मणोऽधिपतिः – वेद/ब्रह्म के स्वामी, 150. ब्रह्मा – सृष्टिकर्ता स्वरूप, 151. शिवः – कल्याणमय, 152. सदाशिवः – नित्य मंगलस्वरूप
श्लोक 20
नीलकण्ठः त्रिनेत्रश्च उमाकान्तः महेश्वरः ।
गंगाधरः कृपानिधिः भक्तानुग्रहकारकः ॥
153.नीलकण्ठः – नीले कंठ वाले, 154. त्रिनेत्रः – तीन नेत्रों वाले, 155. उमाकान्तः – उमा के प्रिय, 156. महेश्वरः – महान ईश्वर, 157. गंगाधरः – गंगा को धारण करने वाले, 158. कृपानिधिः – करुणा के भंडार, 159. भक्तानुग्रहकारकः – भक्तों पर अनुग्रह करने वाले
श्लोक 21
भूताधिपो भूतपतिर्भूतात्मा भूतभावनः ।
रुद्रः पशुपतिः शर्वः स्थाणुः त्रिलोचनः ॥
160.भूताधिपः – प्राणियों के अधिपति, 161. भूतपतिः – जीवों के स्वामी, 162. भूतात्मा – सबमें स्थित आत्मा, 163. भूतभावनः – सबका पालनकर्ता, 164. रुद्रः – दुःख नाशक, 165. पशुपतिः – जीवों के स्वामी, 166. शर्वः – संहारकर्ता, 167. स्थाणुः – अचल, 168. त्रिलोचनः – तीन नेत्रों वाले
श्लोक 22
महाकालः कालभैरवः कालात्मा कालभैरवः ।
कालयोगी महातेजाः कालेशः कालनायकः ॥
169.महाकालः – समय के भी स्वामी, 170. कालभैरवः – कालरूप भैरव, 171. कालात्मा – स्वयं कालस्वरूप, 172. कालभैरवः – प्रचंड कालरूप, 173. कालयोगी – काल में स्थित योगी, 174. महातेजाः – महान तेजस्वी, 175. कालेशः – काल के ईश्वर, 176. कालनायकः – समय के नियंत्रक
श्लोक 23
दिगम्बरः अष्टमूर्तिः अनघः परमेश्वरः ।
त्रिपुरारिः महेशानो गिरिजापतिः शूलधृत् ॥
177.दिगम्बरः – आकाश वस्त्र धारण करने वाले, 178. अष्टमूर्तिः – आठ रूपों वाले, 179. अनघः – निष्पाप, 180. परमेश्वरः – सर्वोच्च ईश्वर, 181. त्रिपुरारिः – त्रिपुरासुर के शत्रु, 182. महेशानः – महान ईश्वर, 183. गिरिजापतिः – गिरिजा (पार्वती) के पति, 184. शूलधृत् – त्रिशूल धारण करने वाले
श्लोक 24
भवः शर्वः रुद्रः पशुपतिः उग्रः महादेवः ।
भीमः ईश्वरः शम्भुः शिवः शंकरः ॥
185.भवः – सृष्टि के कारण, 186. शर्वः – संहारकर्ता, 187. रुद्रः – दुःख हरने वाले, 188. पशुपतिः – जीवों के स्वामी, 189. उग्रः – प्रचंड, 190. महादेवः – महान देव, 191. भीमः – भयानक रूप, 192. ईश्वरः – सर्वाधिपति, 193. शम्भुः – कल्याणदाता, 194. शिवः – मंगलस्वरूप, 195. शंकरः – कल्याण करने वाले
श्लोक 25
अचिन्त्यः अव्यक्तरूपः शाश्वतः शान्तः सनातनः ।
अनादिमध्यान्तहीनः परब्रह्म परमात्मा ॥
196.अचिन्त्यः – जिनका चिंतन कठिन, 197. अव्यक्तरूपः – अप्रकट स्वरूप, 198. शाश्वतः – सदैव रहने वाले, 199. शान्तः – शांति स्वरूप, 200. सनातनः – आदि-अनादि, 201. अनादिमध्यान्तहीनः – जिनका आदि, मध्य, अंत नहीं, 202. परब्रह्म – सर्वोच्च ब्रह्म, 203. परमात्मा – परम आत्मा
श्लोक 26
नटराजः नटराजेश्वरः नटराजाधिपतिः नटेश्वरः ।
नटराजसिंहः नटराजभद्रः नटराजकान्तिः नटराजप्रभुः ॥
204.नटराजः – नृत्य के स्वामी, 205. नटराजेश्वरः – नटराज के ईश्वर, 206. नटराजाधिपतिः – नटराज के अधिपति, 207. नटेश्वरः – नटों के स्वामी, 208. नटराजसिंहः – नटराज रूपी सिंह, 209. नटराजभद्रः – शुभकारी नटराज, 210. नटराजकान्तिः – नटराज का प्रकाश, 211. नटराजप्रभुः – नटराज का प्रभुत्व
श्लोक 27
भूतनाथः भूतनाथेश्वरः भूतनाथपतिः भूतनाथेश्वरः ।
भूतनाथरूपः भूतनाथात्मा भूतनाथपराक्रमः भूतनाथशिवः ॥
212.भूतनाथः – सभी जीवों के स्वामी, 213. भूतनाथेश्वरः – भूतनाथ के ईश्वर, 214. भूतनाथपतिः – भूतनाथ के पति, 215. भूतनाथेश्वरः – जीवों के स्वामी (ईश्वर रूप), 216. भूतनाथरूपः – भूतनाथ स्वरूप, 217. भूतनाथात्मा – भूतनाथ का आत्मा, 218. भूतनाथपराक्रमः – वीर भूतनाथ, 219. भूतनाथशिवः – भूतनाथ शिव स्वरूप
श्लोक 28
वृषभवाहनः वृषभध्वजः वृषभारूढः वृषभेश्वरः ।
वृषभपतिर्भैरवः वृषभनाथः वृषभरूपः वृषभप्रभुः ॥
220.वृषभवाहनः – वृषभ (बैल) पर सवार, 221. वृषभध्वजः – बैल ध्वजधारी, 222. वृषभारूढः – बैल पर आरोहण, 223. वृषभेश्वरः – बैल के स्वामी, 224. वृषभपतिर्भैरवः – भैरव रूपी बैलपति, 225. वृषभनाथः – बैलनाथ, 226. वृषभरूपः – बैल रूप वाले, 227. वृषभप्रभुः – बैल के प्रभु
श्लोक 29
त्रैलोक्यनाथः त्रैलोक्येश्वरः त्रैलोक्याधिपतिः त्रैलोक्यशिवः ।
त्रैलोक्यभैरवः त्रैलोक्यनाथात्मा त्रैलोक्यपराक्रमः त्रैलोक्यप्रभुः ॥
228.त्रैलोक्यनाथः – तीनों लोकों के स्वामी, 229. त्रैलोक्येश्वरः – त्रैलोक्य ईश्वर, 230. त्रैलोक्याधिपतिः – त्रैलोक्य का अधिपति, 231. त्रैलोक्यशिवः – त्रैलोक्य शिव, 232. त्रैलोक्यभैरवः – त्रैलोक्य भैरव, 233. त्रैलोक्यनाथात्मा – त्रैलोक्य स्वामी का आत्मा, 234. त्रैलोक्यपराक्रमः – वीर त्रैलोक्य स्वामी, 235. त्रैलोक्यप्रभुः – त्रैलोक्य के प्रभु
श्लोक 30
महाशिवः महेश्वरः विश्वनाथः विश्वेश्वरः विश्वेश्वरनाथः ।
महादेवः शिवेश्वरः शिवानन्दः शिवशंकरः शिवाभयः ॥
236.महाशिवः – महान शिव, 237. महेश्वरः – महान ईश्वर, 238. विश्वनाथः – सम्पूर्ण जगत के स्वामी, 239. विश्वेश्वरः – विश्व का ईश्वर, 240. विश्वेश्वरनाथः – विश्वेश्वर का स्वामी, 241. महादेवः – महान देव, 242. शिवेश्वरः – शिव ईश्वर, 243. शिवानन्दः – शिव का आनंद, 244. शिवशंकरः – कल्याणकारी शिव, 245. शिवाभयः – भय हरने वाले शिव
श्लोक 31
सच्चिदानन्दः सत्त्विकः सदाशिवः शिवोऽहम्
शिवात्मा शिवभूतः शिवभक्तः शिवप्रभुः ॥
246.सच्चिदानन्दः – सत्य, चेतना और आनंद रूप, 247. सत्त्विकः – सत्त्व गुण वाले, 248. सदाशिवः – सदैव शिव स्वरूप, 249. शिवोऽहम् – “मैं शिव हूँ”, 250. शिवात्मा – शिव का आत्मा, 251. शिवभूतः – शिव सभी प्राणियों में व्याप्त, 252. शिवभक्तः – शिव का भक्त, 253. शिवप्रभुः – शिव का प्रभु
श्लोक 32
अर्द्धनारीश्वरः अघोरः अन्नपूर्णः वृषभवाहनः
त्रैलोक्यनाथः महाशिवः विश्वनाथः च ॥
254.अर्द्धनारीश्वरः – पार्वती के साथ ईश्वर, 255. अघोरः – भयकारी रूप वाले, 256. अन्नपूर्णः – अन्न देने वाले, 257. वृषभवाहनः – बैल पर सवार, 258. त्रैलोक्यनाथः – तीनों लोकों के स्वामी, 259. महाशिवः – महान शिव, 260. विश्वनाथः – सम्पूर्ण जगत के स्वामी
श्लोक 33
सच्चिदानन्दः सत्त्विकः सदाशिवः शिवोऽहम्
शिवात्मा शिवभूतः शिवभक्तः शिवप्रभुः ॥
261.सच्चिदानन्दः – सत्य, चेतना और आनंद रूप, 262. सत्त्विकः – सत्त्व गुण वाले, 263. सदाशिवः – सदैव शिव स्वरूप, 264. शिवोऽहम् – “मैं शिव हूँ”, 265. शिवात्मा – शिव का आत्मा, 266. शिवभूतः – शिव सभी प्राणियों में व्याप्त, 267. शिवभक्तः – शिव का भक्त, 268. शिवप्रभुः – शिव का प्रभु
श्लोक 34
महादेवः भूतनाथः भूतनाथेश्वरः भूतनाथपतिः
भूतनाथपराक्रमः भूतनाथशिवः भूतनाथनाथः भूतनाथभद्रः ॥
269.महादेवः – महान देव, 270. भूतनाथः – सभी जीवों के स्वामी, 271. भूतनाथेश्वरः – भूतनाथ के ईश्वर, 272. भूतनाथपतिः – भूतनाथ के पति, 273. भूतनाथपराक्रमः – वीर भूतनाथ, 274. भूतनाथशिवः – भूतनाथ शिव स्वरूप, 275. भूतनाथनाथः – भूतनाथ का स्वामी, 276. भूतनाथभद्रः – शुभकारी भूतनाथ
श्लोक 35
वृषभध्वजः वृषभारूढः वृषभेश्वरः वृषभपतिर्भैरवः
वृषभनाथः वृषभरूपः वृषभप्रभुः वृषभभद्रः ॥
277.वृषभध्वजः – बैल ध्वजधारी, 278. वृषभारूढः – बैल पर आरोहण, 279. वृषभेश्वरः – बैल के स्वामी, 280. वृषभपतिर्भैरवः – भैरव रूपी बैलपति, 281. वृषभनाथः – बैलनाथ, 282. वृषभरूपः – बैल रूप वाले, 283. वृषभप्रभुः – बैल के प्रभु, 284. वृषभभद्रः – शुभकारी बैलस्वामी
श्लोक 36
त्रिनेत्रः त्रिलोकेश्वरः त्रिलोकनाथः त्रिपुरान्तकः
त्रिपुरध्वजः त्रिपुरेश्वरः त्रिपुरभैरवः त्रिपुरनाथः ॥
285.त्रिनेत्रः – तीन आंखों वाले, 286. त्रिलोकेश्वरः – तीनों लोकों के ईश्वर, 287. त्रिलोकनाथः – तीनों लोकों के स्वामी, 288. त्रिपुरान्तकः – त्रिपुरासुर का संहारक, 289. त्रिपुरध्वजः – त्रिपुरासुर के ध्वज वाले, 290. त्रिपुरेश्वरः – त्रिपुरासुर के ईश्वर, 291. त्रिपुरभैरवः – त्रिपुरासुर का भैरव रूप, 292. त्रिपुरनाथः – त्रिपुरासुर के स्वामी
श्लोक 37
महाकालः कालभैरवः कालायनः कालेश्वरः
कालनाथः कालराजः कालेश्वरपतिः कालभद्रः ॥
293.महाकालः – समय का अधिपति, 294. कालभैरवः – भयकारी समय के देवता, 295. कालायनः – समय की ओर अग्रसर, 296. कालेश्वरः – समय के ईश्वर, 297. कालनाथः – समय का स्वामी, 298. कालराजः – समय का राजा, 299. कालेश्वरपतिः – समय के प्रभु, 300. कालभद्रः – शुभकारी समय
श्लोक 38
भस्माङ्कितः भस्मधारी भस्माभूषितः भस्मभूषितः
भस्मस्नेही भस्मरूपः भस्मनाथः भस्मभद्रः ॥
301.भस्माङ्कितः – भस्म से चिन्हित, 302. भस्मधारी – भस्म धारण करने वाले, 303. भस्माभूषितः – भस्म से सुसज्जित, 304. भस्मभूषितः – भस्म से अलंकृत, 305. भस्मस्नेही – भस्म प्रिय, 306. भस्मरूपः – भस्म रूप वाले, 307. भस्मनाथः – भस्म के स्वामी, 308. भस्मभद्रः – शुभकारी भस्मधारी
श्लोक 39
नागभूषितः नागेश्वरः नागनाथः नागराजः
नागभैरवः नागपतिः नागरूपः नागप्रभुः नागभद्रः ॥
309.नागभूषितः – नाग से सज्जित, 310. नागेश्वरः – नागों के ईश्वर, 311. नागनाथः – नागों के स्वामी, 312. नागराजः – नागों का राजा, 313. नागभैरवः – नागों का भैरव रूप, 314. नागपतिः – नागों का प्रभु, 315. नागरूपः – नाग रूप वाले, 316. नागप्रभुः – नागों के स्वामी, 317. नागभद्रः – शुभकारी नाग
श्लोक 40
पिनाकधारी पिनाकेश्वरः पिनाकनाथः पिनाकभूषितः
पिनाकभैरवः पिनाकपतिः पिनाकरूपः पिनाकप्रभुः पिनाकभद्रः ॥
318.पिनाकधारी – पिनाक धनुषधारी, 319. पिनाकेश्वरः – पिनाक के ईश्वर, 320. पिनाकनाथः – पिनाक के स्वामी, 321. पिनाकभूषितः – पिनाक से सुसज्जित, 322. पिनाकभैरवः – पिनाक के भैरव रूप, 323. पिनाकपतिः – पिनाक के प्रभु, 324. पिनाकरूपः – पिनाक रूप वाले, 325. पिनाकप्रभुः – पिनाक के स्वामी, 326. पिनाकभद्रः – शुभकारी पिनाकधारी
श्लोक 41
योगी योगविदां नेता योगीश्वरः सनातनः
सर्वज्ञः सर्वकर्त्ता च सर्वलोकनमस्कृतः ॥
327.योगी – योग में निपुण, 328. योगविदां नेता – योग विद्वानों के गुरु, 329. योगीश्वरः – योग का ईश्वर, 330. सनातनः – शाश्वत, अनादि, 331. सर्वज्ञः – सर्वज्ञानी, 332. सर्वकर्त्ता – सभी कर्ताओं के अधिपति, 333. सर्वलोकनमस्कृतः – सबके द्वारा पूजनीय
श्लोक 42
महादेवो महात्मा च महायोगी महेश्वरः
महाबुद्धिर्महातेजा महाबलपराक्रमः ॥
334.महादेवो – महान देव, 335. महात्मा – महान आत्मा, 336. महायोगी – महान योगी, 337. महेश्वरः – महा ईश्वर, 338. महाबुद्धिः – महान बुद्धि वाले, 339. महातेजा – महान तेजस्वी, 340. महाबलपराक्रमः – महान शक्ति और पराक्रम वाले
श्लोक 43
त्र्यम्बकः त्रिलोचनः त्रिपुरान्तकः त्रिनेत्रधारी
सच्चिदानन्दः शुद्धात्मा सदाशिवः शिवार्चितः ॥
341.त्र्यम्बकः – तीन नेत्र वाले, 342. त्रिलोचनः – तीन आंखों वाले, 343. त्रिपुरान्तकः – त्रिपुरासुर का संहारक, 344. त्रिनेत्रधारी – तीन आंखों का धारी, 345. सच्चिदानन्दः – सत्य, चेतना और आनंद रूप, 346. शुद्धात्मा – शुद्ध आत्मा, 347. सदाशिवः – सदैव शिव स्वरूप, 348. शिवार्चितः – शिव की पूजा योग्य
श्लोक 44
भुवननाथः भुवनेश्वरः भुवनपतिर्भुवनेश्वरः
भुवनभद्रः भुवनभानुः भुवनप्रभुः भुवनराजः ॥
349.भुवननाथः – भुवनों के स्वामी, 350. भुवनेश्वरः – भुवनों के ईश्वर, 351. भुवनपति – भुवनों के प्रभु, 352. भुवनेश्वरः – भुवनों के अधिपति, 353. भुवनभद्रः – शुभकारी भुवनपति, 354. भुवनभानुः – भुवनों में प्रकाशित, 355. भुवनप्रभुः – भुवनों के प्रभु, 356. भुवनराजः – भुवनों का राजा
श्लोक 45
नित्यानन्दः नित्यानिधिः नित्यशिवः नित्यभद्रः
नित्ययोगी नित्यात्मा नित्यप्रभुः नित्यशक्तिः ॥
357.नित्यानन्दः – सदैव आनंदित, 358. नित्यानिधिः – अनंत खजाना, 359. नित्यशिवः – सदैव शिव रूप, 360. नित्यभद्रः – सदैव शुभ, 361. नित्ययोगी – सदैव योगी, 362. नित्यात्मा – अनंत आत्मा, 363. नित्यप्रभुः – अनंत प्रभु, 364. नित्यशक्तिः – अनंत शक्ति
श्लोक 46
अर्धनारीश्वरः अघोरः अन्नपूर्णः वृषभवाहनः
त्रैलोक्यनाथः महाशिवः विश्वनाथः शिवोऽहम् ॥
365.अर्धनारीश्वरः – पार्वती के साथ ईश्वर, 366. अघोरः – भयकारी रूप वाले, 367. अन्नपूर्णः – अन्न देने वाले, 368. वृषभवाहनः – बैल पर सवार, 369. त्रैलोक्यनाथः – तीनों लोकों के स्वामी, 370. महाशिवः – महान शिव, 371. विश्वनाथः – सम्पूर्ण जगत के स्वामी, 372. शिवोऽहम् – “मैं शिव हूँ”
श्लोक 47
सच्चिदानन्दः सत्त्विकः सदाशिवः शंकरः
भूतनाथः भूतपतिर्भूतभैरवः भैरवः ॥
373.सच्चिदानन्दः – सत्य, चेतना और आनंद रूप, 374. सत्त्विकः – सत्त्व गुण वाले, 375. सदाशिवः – सदैव शिव स्वरूप, 376. शंकरः – शुभ देने वाले, 377. भूतनाथः – जीवों के स्वामी, 378. भूतपति – भूतों के अधिपति, 379. भूतभैरवः – भूतों का भयकारी स्वामी, 380. भैरवः – भयभीत करने वाले
श्लोक 48
महाकालः कालभैरवः कालोत्राहः कालाग्निः
महाकपालेश्वरः महादारिद्र्यहरः महेश्वरः ॥
381.महाकालः – समय के स्वामी, 382. कालभैरवः – समय और मृत्यु के अधिपति, 383. कालोत्राहः – मृत्यु से भय न देने वाला, 384. कालाग्निः – समय की अग्नि रूपी शक्ति, 385. महाकपालेश्वरः – खोपड़ीधारी महा ईश्वर, 386. महादारिद्र्यहरः – गरीबी दूर करने वाले, 387. महेश्वरः – महान ईश्वर
श्लोक 49
नागेश्वरः नागधारी नागराजः नागभवः
नागविनायकः नागपत्निः नागनायकः नागनाथः ॥
388.नागेश्वरः – नागों के स्वामी, 389. नागधारी – नागधारी, 390. नागराजः – नागों के राजा, 391. नागभवः – नागों का जन्मदाता, 392. नागविनायकः – नागों के प्रमुख, 393. नागपत्निः – नागों की पत्नी के सम्मानित, 394. नागनायकः – नागों का नेता, 395. नागनाथः – नागों के अधिपति
श्लोक 50
सर्वशक्तिमान् सर्वभूतनाथः सर्वविद्याधरः
सर्वलोकप्रियः सर्वसिद्धिदायकः सर्वसंतुष्टः ॥
396.सर्वशक्तिमान् – सभी शक्तियों वाले, 397. सर्वभूतनाथः – सभी प्राणियों के स्वामी, 398. सर्वविद्याधरः – सभी विद्या के धारक, 399. सर्वलोकप्रियः – सभी लोकों में प्रिय, 400. सर्वसिद्धिदायकः – सभी सिद्धियों को देने वाले, 401. सर्वसंतुष्टः – सभी को संतुष्ट करने वाले
श्लोक 51
महादेवः महागणपतिः महाकपर्दिनः महाशक्तिः
महादारिद्र्यहरः महाज्ञानी महाकल्पेश्वरः ॥
402.महादेवः – महान ईश्वर, 403. महागणपतिः – गणपतियों के प्रमुख, 404. महाकपर्दिनः – बड़ी जटाओं वाले, 405. महाशक्तिः – सभी शक्तियों वाले, 406. महादारिद्र्यहरः – गरीबी दूर करने वाले, 407. महाज्ञानी – महान ज्ञानी, 408. महाकल्पेश्वरः – समय और कल्पों के स्वामी
श्लोक 52
त्रिनेत्रः त्रिनेत्रधारी त्रिपुरारी त्रिपुरभवः
त्रैलोक्यपालः त्रैलोक्यनायकः त्रैलोक्यसुतः त्रैलोक्यनिवासिन् ॥
409.त्रिनेत्रः – तीन नेत्रों वाले, 410. त्रिनेत्रधारी – त्रिनेत्रधारी, 411. त्रिपुरारी – त्रिपुरासुरों के विनाशक, 412. त्रिपुरभवः – त्रिपुर में निवास करने वाले, 413. त्रैलोक्यपालः – तीनों लोकों के पालक, 414. त्रैलोक्यनायकः – तीनों लोकों के नायक, 415. त्रैलोक्यसुतः – तीनों लोकों का पुत्र, 416. त्रैलोक्यनिवासिन् – तीनों लोकों में निवास करने वाले
श्लोक 53
भूतनाथः भूतपतिर्भूतसखा भूतभवः
भूतसिद्धिदायकः भूतभैरवः भूतनाथः भूतात्मजः ॥
417.भूतनाथः – जीवों के स्वामी, 418. भूतपति – भूतों के अधिपति, 419. भूतसखा – भूतों के मित्र, 420. भूतभवः – भूतों का जन्मदाता, 421. भूतसिद्धिदायकः – भूतों को सिद्धि देने वाले, 422. भूतभैरवः – भूतों का भयकारी स्वामी, 423. भूतनाथः – सभी भूतों का स्वामी, 424. भूतात्मजः – भूतों का पुत्र
श्लोक 54
महाकालः कालभैरवः कालोत्राहः कालाग्निः
कालविष्णुः कालेश्वरः कालशिवः कालभूतनाथः ॥
425.महाकालः – समय के स्वामी, 426. कालभैरवः – समय और मृत्यु के अधिपति, 427. कालोत्राहः – मृत्यु से भय न देने वाला, 428. कालाग्निः – समय की अग्नि रूपी शक्ति, 429. कालविष्णुः – समय के विष्णु रूप वाले, 430. कालेश्वरः – काल के स्वामी, 431. कालशिवः – काल में शिव रूप, 432. कालभूतनाथः – काल में भूतों के स्वामी
श्लोक 55
सर्वशक्तिमान् सर्वज्ञः सर्वसिद्धिदायकः
सर्वभूतनाथः सर्वसंतुष्टः सर्वलोकप्रियः सर्वशरणम् ॥
433.सर्वशक्तिमान् – सभी शक्तियों वाले, 434. सर्वज्ञः – सभी ज्ञानों वाले, 435. सर्वसिद्धिदायकः – सभी सिद्धियां देने वाले, 436. सर्वभूतनाथः – सभी प्राणियों के स्वामी, 437. सर्वसंतुष्टः – सभी को संतुष्ट करने वाले, 438. सर्वलोकप्रियः – सभी लोकों में प्रिय, 439. सर्वशरणम् – सभी के लिए शरण
श्लोक 56
विघ्नेश्वरः विनायकः विघ्नहरः विघ्ननायकः
विघ्ननाथः विघ्नसुखप्रदः विघ्नभंजकः विघ्नमोचनः ॥
440.विघ्नेश्वरः – विघ्नों के स्वामी, 441. विनायकः – बाधाओं को दूर करने वाले, 442. विघ्नहरः – सभी विघ्नों को हरने वाले, 443. विघ्ननायकः – विघ्नों के नायक, 444. विघ्ननाथः – विघ्नों के स्वामी, 445. विघ्नसुखप्रदः – सुख देने वाले, 446. विघ्नभंजकः – बाधाएं तोड़ने वाले, 447. विघ्नमोचनः – विघ्नों से मुक्त करने वाले
श्लोक 57
महाशक्तिमान् महायोगी महादेवः
महाबलप्रदः महाब्रह्मन् महात्मा महेश्वरः ॥
448.महाशक्तिमान् – महान शक्ति वाले, 449. महायोगी – योग के महान ज्ञानी, 450. महादेवः – महान ईश्वर, 451. महाबलप्रदः – महान बल देने वाले, 452. महाब्रह्मन् – ब्रह्मा रूपी महाशक्ति, 453. महात्मा – महान आत्मा वाले, 454. महेश्वरः – महान स्वामी
श्लोक 58
पिनाकधारी पिनाकनाथः पिनाकशेखरः पिनाकप्रभुः
पिनाकसर्वेश्वरः पिनाकभूषणः पिनाकसंपत् पिनाकसुखप्रदः ॥
455.पिनाकधारी – पिनाक (त्रिशूल) धारण करने वाले, 456. पिनाकनाथः – पिनाक के स्वामी, 457. पिनाकशेखरः – पिनाक के माथे वाले, 458. पिनाकप्रभुः – पिनाक के प्रभु, 459. पिनाकसर्वेश्वरः – पिनाक के सभी स्वामी, 460. पिनाकभूषणः – पिनाक का आभूषण, 461. पिनाकसंपत् – पिनाक की संपत्ति देने वाले, 462. पिनाकसुखप्रदः – पिनाक द्वारा सुख देने वाले
श्लोक 59
त्रिशूलधारी त्रिशूलनाथः त्रिशूलभूषणः
त्रिशूलसंपत् त्रिशूलशेखरः त्रिशूलप्रभुः त्रिशूलमोचनः ॥
463.त्रिशूलधारी – त्रिशूल धारण करने वाले, 464. त्रिशूलनाथः – त्रिशूल के स्वामी, 465. त्रिशूलभूषणः – त्रिशूल का आभूषण, 466. त्रिशूलसंपत् – त्रिशूल की संपत्ति देने वाले, 467. त्रिशूलशेखरः – त्रिशूल माथे पर धारण करने वाले, 468. त्रिशूलप्रभुः – त्रिशूल के प्रभु, 469. त्रिशूलमोचनः – त्रिशूल से संकट मोचन
श्लोक 60
गंगाधरः गंगाधारी गंगाप्रभुः
गंगाप्रवर्तकः गंगासुधाकरः गंगासम्पत् गंगामयूखः गंगानिधिः ॥
470.गंगाधरः – गंगा धारण करने वाले, 471. गंगाधारी – गंगा के धारक, 472. गंगाप्रभुः – गंगा के प्रभु, 473. गंगाप्रवर्तकः – गंगा प्रवर्तक, 474. गंगासुधाकरः – गंगा के सुधा देने वाले, 475. गंगासंपत् – गंगा की संपत्ति देने वाले, 476. गंगामयूखः – गंगा की किरण रूपी शक्ति वाले, 477. गंगानिधिः – गंगा का खजाना
श्लोक 61
कामेश्वरः कामरूपः कामदीपकः
कामसुधाकरः कामप्रदः काममोचनः ॥
478.कामेश्वरः – इच्छाओं के स्वामी, 479. कामरूपः – काम के रूप वाले, 480. कामदीपकः – इच्छाओं का दीपक, 481. कामसुधाकरः – इच्छाओं का निर्मात्ता, 482. कामप्रदः – इच्छाओं को पूरा करने वाले, 483. काममोचनः – कामों से मुक्त करने वाले
श्लोक 62
भस्मधारी भस्मभूषणः भस्मनाथः
भस्ममोचनः भस्मसंपत् भस्मप्रभुः भस्मसिद्धिः ॥
484.भस्मधारी – भस्म धारण करने वाले, 485. भस्मभूषणः – भस्म का आभूषण, 486. भस्मनाथः – भस्म के स्वामी, 487. भस्ममोचनः – भस्म से मोक्ष देने वाले, 488. भस्मसंपत् – भस्म से संपत्ति देने वाले, 489. भस्मप्रभुः – भस्म के प्रभु, 490. भस्मसिद्धिः – भस्म से सिद्धि देने वाले
श्लोक 63
रुद्रः रुद्रनाथः रुद्रेश्वरः रुद्रमोचनः
रुद्रसिद्धिः रुद्रभूषणः रुद्रप्रभुः रुद्रसंपत् ॥
491.रुद्रः – क्रोधित शिव रूप, 492. रुद्रनाथः – रुद्र के स्वामी, 493. रुद्रेश्वरः – रुद्र ईश्वर, 494. रुद्रमोचनः – रुद्र से मोक्ष देने वाले, 495. रुद्रसिद्धिः – रुद्र से सिद्धि देने वाले, 496. रुद्रभूषणः – रुद्र का आभूषण, 497. रुद्रप्रभुः – रुद्र के प्रभु, 498. रुद्रसंपत् – रुद्र की संपत्ति देने वाले
श्लोक 64
नागधारी नागनाथः नागमोचनः नागभूषणः
नागसंपत् नागप्रभुः नागसुखप्रदः नागसिद्धिः ॥
499.नागधारी – नाग धारण करने वाले, 500. नागनाथः – नागों के स्वामी, 501. नागमोचनः – नागों से मोक्ष देने वाले, 502. नागभूषणः – नाग का आभूषण, 503. नागसंपत् – नागों से संपत्ति देने वाले, 504. नागप्रभुः – नागों के प्रभु, 505. नागसुखप्रदः – नागों से सुख देने वाले, 506. नागसिद्धिः – नागों से सिद्धि देने वाले
श्लोक 65
शंखधारी शंखनाथः शंखप्रभुः शंखसंपत्
शंखमोचनः शंखभूषणः शंखसिद्धिः शंखसुखप्रदः ॥
507.शंखधारी – शंख धारण करने वाले, 508. शंखनाथः – शंख के स्वामी, 509. शंखप्रभुः – शंख के प्रभु, 510. शंखसंपत् – शंख से संपत्ति देने वाले, 511. शंखमोचनः – शंख से मोक्ष देने वाले, 512. शंखभूषणः – शंख का आभूषण, 513. शंखसिद्धिः – शंख से सिद्धि देने वाले, 514. शंखसुखप्रदः – शंख से सुख देने वाले
श्लोक 66
कालभैरवः कालनाथः कालप्रभुः कालसंपत्
कालमोचनः कालभूषणः कालसिद्धिः कालसुखप्रदः ॥
515.कालभैरवः – भैरव रूपी समय के स्वामी, 516. कालनाथः – समय के स्वामी, 517. कालप्रभुः – समय का प्रभु, 518. कालसंपत् – समय से संपत्ति देने वाले, 519. कालमोचनः – समय से मोक्ष देने वाले, 520. कालभूषणः – समय का आभूषण, 521. कालसिद्धिः – समय से सिद्धि देने वाले, 522. कालसुखप्रदः – समय से सुख देने वाले
श्लोक 67
महाकालः महेश्वरः महाधीश्वरः महाभूषणः
महासंपत् महाप्रभुः महमोचनः महासिद्धिः ॥
523.महाकालः – समय के महान स्वामी, 524. महेश्वरः – महान ईश्वर, 525. महाधीश्वरः – सभी पर उच्चतम स्वामी, 526. महाभूषणः – महान आभूषण वाले, 527. महासंपत् – महान संपत्ति देने वाले, 528. महाप्रभुः – महान प्रभु, 529. महमोचनः – महान मोक्ष देने वाले, 530. महासिद्धिः – महान सिद्धि देने वाले
श्लोक 68
त्रिपुरान्तकः त्रैलोक्यनायकः त्रिभुवननाथः
त्रिपुरमोचनः त्रिभूषणः त्रिलोकप्रभुः त्रिलोकसंपत् ॥
531.त्रिपुरान्तकः – त्रिपुरासुर का नाश करने वाले, 532. त्रैलोक्यनायकः – तीनों लोकों के स्वामी, 533. त्रिभूवननाथः – तीनों लोकों के स्वामी, 534. त्रिपुरमोचनः – त्रिपुरासुर से मुक्ति देने वाले, 535. त्रिभूषणः – तीनों लोकों का आभूषण, 536. त्रिलोकप्रभुः – तीनों लोकों के प्रभु, 537. त्रिलोकसंपत् – तीनों लोकों से संपत्ति देने वाले
श्लोक 69
सर्वेश्वरः सर्वनाथः सर्वप्रभुः सर्वसंपत्
सर्वमोचनः सर्वभूषणः सर्वसिद्धिः सर्वसुखप्रदः ॥
538.सर्वेश्वरः – सभी के ईश्वर, 539. सर्वनाथः – सभी के स्वामी, 540. सर्वप्रभुः – सभी का प्रभु, 541. सर्वसंपत् – सभी को संपत्ति देने वाले, 542. सर्वमोचनः – सभी को मोक्ष देने वाले, 543. सर्वभूषणः – सभी का आभूषण, 544. सर्वसिद्धिः – सभी को सिद्धि देने वाले, 545. सर्वसुखप्रदः – सभी को सुख देने वाले
श्लोक 70
जगन्नाथः जगदीश्वरः जगप्रभुः जगमोचनः
जगसंपत् जगभूषणः जगसिद्धिः जगसुखप्रदः ॥
546.जगन्नाथः – जगत के स्वामी, 547. जगदीश्वरः – जगत के ईश्वर, 548. जगप्रभुः – जगत के प्रभु, 549. जगमोचनः – जगत को मोक्ष देने वाले, 550. जगसंपत् – जगत से संपत्ति देने वाले, 551. जगभूषणः – जगत का आभूषण, 552. जगसिद्धिः – जगत को सिद्धि देने वाले, 553. जगसुखप्रदः – जगत को सुख देने वाले
श्लोक 71
सत्यनाथः सत्यप्रभुः सत्यसंपत् सत्यमोचनः
सत्यभूषणः सत्यसिद्धिः सत्यसुखप्रदः सत्यमूर्तिः ॥
554.भस्मप्रियः – भस्म प्रिय रखने वाले, 555. भस्मशायी – भस्म में शयन करने वाले, 556. भस्मोद्धूलितविग्रहः – भस्म से विभूषित, 557. भूतनाथः – प्राणियों के स्वामी, 558. महादेवः – महान देव, 559. लोकनाथः – लोकों के स्वामी, 560. जगद्गुरुः – समस्त जगत के गुरु
श्लोक 72
आनन्दनाथः आनन्दप्रभुः आनंदसंपत् आनंदमोचनः
आनंदभूषणः आनंदसिद्धिः आनंदसुखप्रदः आनंदमूर्तिः ॥
561.आनन्दनाथः – आनंद के स्वामी, 562. आनन्दप्रभुः – आनंद का प्रभु, 563. आनंदसंपत् – आनंद से संपत्ति देने वाले, 564. आनंदमोचनः – आनंद से मोक्ष देने वाले, 565. आनंदभूषणः – आनंद का आभूषण, 566. आनंदसिद्धिः – आनंद से सिद्धि देने वाले, 567. आनंदसुखप्रदः – आनंद से सुख देने वाले, 568. आनंदमूर्तिः – आनंद रूप
श्लोक 73
ध्याननाथः ध्यानप्रभुः ध्यानसंपत् ध्यानमोचनः
ध्यानभूषणः ध्यानसिद्धिः ध्यानसुखप्रदः ध्यानमूर्तिः ॥
569.ध्याननाथः – ध्यान के स्वामी, 570. ध्यानप्रभुः – ध्यान का प्रभु, 571. ध्यानसंपत् – ध्यान से संपत्ति देने वाले, 572. ध्यानमोचनः – ध्यान से मोक्ष देने वाले, 573. ध्यानभूषणः – ध्यान का आभूषण, 574. ध्यानसिद्धिः – ध्यान से सिद्धि देने वाले, 575. ध्यानसुखप्रदः – ध्यान से सुख देने वाले, 576. ध्यानमूर्तिः – ध्यान रूप
श्लोक 74
शिवनाथः शिवप्रभुः शिवसंपत् शिवमोचनः
शिवभूषणः शिवसिद्धिः शिवसुखप्रदः शिवमूर्तिः ॥
577.शिवनाथः – शिव के स्वामी, 578. शिवप्रभुः – शिव का प्रभु, 579. शिवसंपत् – शिव से संपत्ति देने वाले, 580. शिवमोचनः – शिव से मोक्ष देने वाले, 581. शिवभूषणः – शिव का आभूषण, 582. शिवसिद्धिः – शिव से सिद्धि देने वाले, 583. शिवसुखप्रदः – शिव से सुख देने वाले, 584. शिवमूर्तिः – शिव रूप
श्लोक 75
भैरवनाथः भैरवप्रभुः भैरवसंपत् भैरवमोचनः
भैरवभूषणः भैरवसिद्धिः भैरवसुखप्रदः भैरवमूर्तिः ॥
585.भैरवनाथः – भैरव के स्वामी, 586. भैरवप्रभुः – भैरव का प्रभु, 587. भैरवसंपत् – भैरव से संपत्ति देने वाले, 588. भैरवमोचनः – भैरव से मोक्ष देने वाले, 589. भैरवभूषणः – भैरव का आभूषण, 590. भैरवसिद्धिः – भैरव से सिद्धि देने वाले, 591. भैरवसुखप्रदः – भैरव से सुख देने वाले, 592. भैरवमूर्तिः – भैरव रूप
श्लोक 76
कालनाथः कालप्रभुः कालसंपत् कालमोचनः
कालभूषणः कालसिद्धिः कालसुखप्रदः कालमूर्तिः ॥
593.कालनाथः – समय के स्वामी, 594. कालप्रभुः – समय का प्रभु, 595. कालसंपत् – समय से संपत्ति देने वाले, 596. कालमोचनः – समय से मोक्ष देने वाले, 597. कालभूषणः – समय का आभूषण, 598. कालसिद्धिः – समय से सिद्धि देने वाले, 599. कालसुखप्रदः – समय से सुख देने वाले, 600. कालमूर्तिः – समय रूप
श्लोक 77
महेश्वरनाथः महेश्वरप्रभुः महेश्वरसंपत् महेश्वरमोचनः
महेश्वरभूषणः महेश्वसिद्धिः महेश्वरसुखप्रदः महेश्वरमूर्तिः ॥
601.महेश्वरनाथः – महेश्वर के स्वामी, 602. महेश्वरप्रभुः – महेश्वर का प्रभु, 603. महेश्वरसंपत् – महेश्वर से संपत्ति देने वाले, 604. महेश्वरमोचनः – महेश्वर से मोक्ष देने वाले, 605. महेश्वरभूषणः – महेश्वर का आभूषण, 606. महेश्वसिद्धिः – महेश्वर से सिद्धि देने वाले, 607. महेश्वरसुखप्रदः – महेश्वर से सुख देने वाले, 608. महेश्वरमूर्तिः – महेश्वर रूप
श्लोक 78
त्रिनेत्रनाथः त्रिनेत्रप्रभुः त्रिनेत्रसंपत् त्रिनेत्रमोचनः
त्रिनेत्रभूषणः त्रिनेत्रसिद्धिः त्रिनेत्रसुखप्रदः त्रिनेत्रमूर्तिः ॥
609.त्रिनेत्रनाथः – तीन नेत्रों के स्वामी, 610. त्रिनेत्रप्रभुः – तीन नेत्रों वाले प्रभु, 611. त्रिनेत्रसंपत् – तीन नेत्रों से संपत्ति देने वाले, 612. त्रिनेत्रमोचनः – तीन नेत्रों से मोक्ष देने वाले, 613. त्रिनेत्रभूषणः – तीन नेत्रों का आभूषण, 614. त्रिनेत्रसिद्धिः – तीन नेत्रों से सिद्धि देने वाले, 615. त्रिनेत्रसुखप्रदः – तीन नेत्रों से सुख देने वाले, 616. त्रिनेत्रमूर्तिः – तीन नेत्रों का रूप
श्लोक 79
शूलपाणिः शूलधारिणः शूलसंपत् शूलमोचनः
शूलभूषणः शूलसिद्धिः शूलसुखप्रदः शूलमूर्तिः ॥
617.शूलपाणिः – त्रिशूलधारी, 618. शूलधारिणः – शूल धारण करने वाले, 619. शूलसंपत् – शूल से संपत्ति देने वाले, 620. शूलमोचनः – शूल से मोक्ष देने वाले, 621. शूलभूषणः – शूल का आभूषण, 622. शूलसिद्धिः – शूल से सिद्धि देने वाले, 623. शूलसुखप्रदः – शूल से सुख देने वाले, 624. शूलमूर्तिः – शूल रूप
श्लोक 80
नीलकण्ठः नीलप्रभुः नीलसंपत् नीलमोचनः
नीलभूषणः नीलसिद्धिः नीलसुखप्रदः नीलमूर्तिः ॥
625.नीलकण्ठः – नीला कंठ वाला, 626. नीलप्रभुः – नीला प्रभु, 627. नीलसंपत् – नीला रंग से संपत्ति देने वाले, 628. नीलमोचनः – नीला रूप से मोक्ष देने वाले, 629. नीलभूषणः – नीला आभूषण, 630. नीलसिद्धिः – नीला रूप से सिद्धि देने वाले, 631. नीलसुखप्रदः – नीला रूप से सुख देने वाले, 632. नीलमूर्तिः – नीला रूप
श्लोक 81
वृषभध्वजः वृषभवाहनः वृषभसंपत् वृषभमोचनः
वृषभभूषणः वृषभसिद्धिः वृषभसुखप्रदः वृषभमूर्तिः ॥
633.वृषभध्वजः – वृषभधारी ध्वज वाले, 634. वृषभवाहनः – वृषभ पर सवार, 635. वृषभसंपत् – वृषभ से संपत्ति देने वाले, 636. वृषभमोचनः – वृषभ से मोक्ष देने वाले, 637. वृषभभूषणः – वृषभ का आभूषण, 638. वृषभसिद्धिः – वृषभ से सिद्धि देने वाले, 639. वृषभसुखप्रदः – वृषभ से सुख देने वाले
श्लोक 82
त्रिपुरान्तकः त्रिपुरभंजनः त्रिपुरसंपत् त्रिपुरमोचनः
त्रिपुरभूषणः त्रिपुरसिद्धिः त्रिपुरसुखप्रदः त्रिपुरमूर्तिः ॥
640.त्रिपुरान्तकः – त्रिपुरों के अंत करने वाले, 641. त्रिपुरभंजनः – त्रिपुर का भंजन करने वाले, 642. त्रिपुरसंपत् – त्रिपुर से संपत्ति देने वाले, 643. त्रिपुरमोचनः – त्रिपुर से मोक्ष देने वाले, 644. त्रिपुरभूषणः – त्रिपुर का आभूषण, 645. त्रिपुरसिद्धिः – त्रिपुर से सिद्धि देने वाले, 646. त्रिपुरसुखप्रदः – त्रिपुर से सुख देने वाले, 647. त्रिपुरमूर्तिः – त्रिपुर रूप
श्लोक 83
कालभैरवः कालप्रभुः कालसंपत् कालमोचनः
कालभूषणः कालसिद्धिः कालसुखप्रदः कालमूर्तिः ॥
648.कालभैरवः – समय के भयकारी रक्षक, 649. कालप्रभुः – काल के प्रभु, 650. कालसंपत् – काल से संपत्ति देने वाले, 651. कालमोचनः – काल से मोक्ष देने वाले, 652. कालभूषणः – काल का आभूषण, 653. कालसिद्धिः – काल से सिद्धि देने वाले, 654. कालसुखप्रदः – काल से सुख देने वाले, 655. कालमूर्तिः – काल रूप
श्लोक 84
भूतनाथः भूतप्रभुः भूतसंपत् भूतमोचनः
भूतभूषणः भूतसिद्धिः भूतसुखप्रदः भूतमूर्तिः ॥
656.भूतनाथः – भूतों के स्वामी, 657. भूतप्रभुः – भूतों का प्रभु, 658. भूतसंपत् – भूतों से संपत्ति देने वाले, 659. भूतमोचनः – भूतों से मोक्ष देने वाले, 660. भूतभूषणः – भूतों का आभूषण, 661. भूतसिद्धिः – भूतों से सिद्धि देने वाले, 662. भूतसुखप्रदः – भूतों से सुख देने वाले, 663. भूतमूर्तिः – भूत रूप
श्लोक 85
विभूतनाथः विभूतप्रभुः विभूतसंपत् विभूतमोचनः
विभूतभूषणः विभूतसिद्धिः विभूतसुखप्रदः विभूतमूर्तिः ॥
664.विभूतनाथः – विभूतियों के स्वामी, 665. विभूतप्रभुः – विभूतियों का प्रभु, 666. विभूतसंपत् – विभूतियों से संपत्ति देने वाले, 667. विभूतमोचनः – विभूतियों से मोक्ष देने वाले, 668. विभूतभूषणः – विभूतियों का आभूषण, 669. विभूतसिद्धिः – विभूतियों से सिद्धि देने वाले, 670. विभूतसुखप्रदः – विभूतियों से सुख देने वाले, 671. विभूतमूर्तिः – विभूतियों का रूप
श्लोक 86
महादेवः महाशक्तिः महाकल्पः महामोक्षदः
महाभूषणः महासिद्धिः महासुखप्रदः महामूर्तिः ॥
672.महादेवः – महान देव, 673. महाशक्तिः – महान शक्ति वाले, 674. महाकल्पः – महान कल्प देने वाले, 675. महामोक्षदः – महान मोक्ष देने वाले, 676. महाभूषणः – महान आभूषण, 677. महासिद्धिः – महान सिद्धि देने वाले, 678. महासुखप्रदः – महान सुख देने वाले, 679. महामूर्तिः – महान रूप
श्लोक 87
नटराजः नटराजप्रभुः नटराजसंपत् नटराजमोचनः
नटराजभूषणः नटराजसिद्धिः नटराजसुखप्रदः नटराजमूर्तिः ॥
680.नटराजः – नृत्य के स्वामी, 681. नटराजप्रभुः – नटराज का प्रभु, 682. नटराजसंपत् – नटराज से संपत्ति देने वाले, 683. नटराजमोचनः – नटराज से मोक्ष देने वाले, 684. नटराजभूषणः – नटराज का आभूषण, 685. नटराजसिद्धिः – नटराज से सिद्धि देने वाले, 686. नटराजसुखप्रदः – नटराज से सुख देने वाले, 687. नटराजमूर्तिः – नटराज रूप
श्लोक 88
महाशिवः महाकालः महादक्षिणः महातेजस्विः
महाभूतनाथः महाबलप्रदः महाशक्तिमान् महामूर्तिः ॥
688.महाशिवः – महान शिव, 689. महाकालः – समय के प्रभु, 690. महादक्षिणः – दक्षिणाभिमुख, योग्य कार्यकर्ता, 691. महातेजस्विः – महान तेजस्वी, 692. महाभूतनाथः – भूतों के स्वामी, 693. महाबलप्रदः – महान बल देने वाले, 694. महाशक्तिमान् – शक्तिशाली, 695. महामूर्तिः – महान रूप
श्लोक 89
अवतारः अवतारप्रभुः अवतारसंपत् अवतारमोचनः
अवतारभूषणः अवतारसिद्धिः अवतारसुखप्रदः अवतारमूर्तिः ॥
696.अवतारः – अवतार लेने वाले, 697. अवतारप्रभुः – अवतार का प्रभु, 698. अवतारसंपत् – अवतार से संपत्ति देने वाले, 699. अवतारमोचनः – अवतार से मोक्ष देने वाले, 700. अवतारभूषणः – अवतार का आभूषण, 701. अवतारसिद्धिः – अवतार से सिद्धि देने वाले, 702. अवतारसुखप्रदः – अवतार से सुख देने वाले, 703. अवतारमूर्तिः – अवतार रूप
श्लोक 90
त्रिनेत्रः त्रिनेत्रप्रभुः त्रिनेत्रसंपत् त्रिनेत्रमोचनः
त्रिनेत्रभूषणः त्रिनेत्रसिद्धिः त्रिनेत्रसुखप्रदः त्रिनेत्रमूर्तिः ॥
704.त्रिनेत्रः – तीन नेत्रों वाले, 705. त्रिनेत्रप्रभुः – तीन नेत्रों का प्रभु, 706. त्रिनेत्रसंपत् – तीन नेत्रों से संपत्ति देने वाले, 707. त्रिनेत्रमोचनः – तीन नेत्रों से मोक्ष देने वाले, 708. त्रिनेत्रभूषणः – तीन नेत्रों का आभूषण, 709. त्रिनेत्रसिद्धिः – तीन नेत्रों से सिद्धि देने वाले, 710. त्रिनेत्रसुखप्रदः – तीन नेत्रों से सुख देने वाले, 711. त्रिनेत्रमूर्तिः – तीन नेत्रों का रूप
श्लोक 91
महाकर्पूरः महाकर्पूरप्रभुः महाकर्पूरसंपत् महाकर्पूरमोचनः
महाकर्पूरभूषणः महाकर्पूरसिद्धिः महाकर्पूरसुखप्रदः महाकर्पूरमूर्तिः ॥
712.महाकर्पूरः – करपूर के समान शुद्ध, 713. महाकर्पूरप्रभुः – करपूर के समान प्रभु, 714. महाकर्पूरसंपत् – करपूर से संपत्ति देने वाले, 715. महाकर्पूरमोचनः – करपूर से मोक्ष देने वाले, 716. महाकर्पूरभूषणः – करपूर का आभूषण, 717. महाकर्पूरसिद्धिः – करपूर से सिद्धि देने वाले, 718. महाकर्पूरसुखप्रदः – करपूर से सुख देने वाले, 719. महाकर्पूरमूर्तिः – करपूर रूप
श्लोक 92
कालः कालप्रभुः कालसंपत् कालमोचनः
कालभूषणः कालसिद्धिः कालसुखप्रदः कालमूर्तिः ॥
720.कालः – समय के स्वामी, 721. कालप्रभुः – समय का प्रभु, 722. कालसंपत् – समय से संपत्ति देने वाले, 723. कालमोचनः – समय से मोक्ष देने वाले, 724. कालभूषणः – समय का आभूषण, 725. कालसिद्धिः – समय से सिद्धि देने वाले, 726. कालसुखप्रदः – समय से सुख देने वाले, 727. कालमूर्तिः – समय रूप
श्लोक 93
महाकालः महाकालप्रभुः महाकालसंपत् महाकालमोचनः
महाकालभूषणः महाकालसिद्धिः महाकालसुखप्रदः महाकालमूर्तिः ॥
महाकालः – महाकाल, मृत्यु के स्वामी, 729. महाकालप्रभुः – महाकाल का प्रभु, 730. महाकालसंपत् – महाकाल से संपत्ति देने वाले, 731. महाकालमोचनः – महाकाल से मोक्ष देने वाले, 732. महाकालभूषणः – महाकाल का आभूषण, 733. महाकालसिद्धिः – महाकाल से सिद्धि देने वाले, 734. महाकालसुखप्रदः – महाकाल से सुख देने वाले, 735. महाकालमूर्तिः – महाकाल रूप
श्लोक 94
भूतनाथः भूतनाथप्रभुः भूतनाथसंपत् भूतनाथमोचनः
भूतनाथभूषणः भूतनाथसिद्धिः भूतनाथसुखप्रदः भूतनाथमूर्तिः ॥
736.भूतनाथः – भूतों के स्वामी, 737. भूतनाथप्रभुः – भूतों का प्रभु, 738. भूतनाथसंपत् – भूतों से संपत्ति देने वाले, 739. भूतनाथमोचनः – भूतों से मोक्ष देने वाले, 740. भूतनाथभूषणः – भूतों का आभूषण, 741. भूतनाथसिद्धिः – भूतों से सिद्धि देने वाले, 742. भूतनाथसुखप्रदः – भूतों से सुख देने वाले, 743. भूतनाथमूर्तिः – भूतों का रूप
श्लोक 95
शिवः शिवप्रभुः शिवसंपत् शिवमोचनः
शिवभूषणः शिवसिद्धिः शिवसुखप्रदः शिवमूर्तिः ॥
744.शिवः – कल्याणकारी, 745. शिवप्रभुः – शिव का प्रभु, 746. शिवसंपत् – शिव से संपत्ति देने वाले, 747. शिवमोचनः – शिव से मोक्ष देने वाले, 748. शिवभूषणः – शिव का आभूषण, 749. शिवसिद्धिः – शिव से सिद्धि देने वाले, 750. शिवसुखप्रदः – शिव से सुख देने वाले, 751. शिवमूर्तिः – शिव का रूप
श्लोक 96
महेश्वरः महेश्वरप्रभुः महेश्वरसंपत् महेश्वरमोचनः
महेश्वरभूषणः महेश्वरसिद्धिः महेश्वरसुखप्रदः महेश्वरमूर्तिः ॥
752.महेश्वरः – महान स्वामी, 753. महेश्वरप्रभुः – महेश्वर का प्रभु, 754. महेश्वरसंपत् – महेश्वर से संपत्ति देने वाले, 755. महेश्वरमोचनः – महेश्वर से मोक्ष देने वाले, 756. महेश्वरभूषणः – महेश्वर का आभूषण, 757. महेश्वरसिद्धिः – महेश्वर से सिद्धि देने वाले, 758. महेश्वरसुखप्रदः – महेश्वर से सुख देने वाले, 759. महेश्वरमूर्तिः – महेश्वर रूप
श्लोक 97
शंभुः शंभु प्रभुः शंभुसंपत् शंभुमोचनः
शंभुभूषणः शंभुसिद्धिः शंभुसुखप्रदः शंभुमूर्तिः ॥
760.शंभुः – कल्याणकारी, 761. शंभु प्रभुः – शंभु का प्रभु, 762. शंभुसंपत् – शंभु से संपत्ति देने वाले, 763. शंभुमोचनः – शंभु से मोक्ष देने वाले, 764. शंभुभूषणः – शंभु का आभूषण, 765. शंभुसिद्धिः – शंभु से सिद्धि देने वाले, 766. शंभुसुखप्रदः – शंभु से सुख देने वाले, 767. शंभुमूर्तिः – शंभु का रूप
श्लोक 98
सत्यनाथः सत्यनाथप्रभुः सत्यनाथसंपत् सत्यनाथमोचनः
सत्यनाथभूषणः सत्यनाथसिद्धिः सत्यनाथसुखप्रदः सत्यनाथमूर्तिः ॥
768.सत्यनाथः – सत्य के स्वामी, 769. सत्यनाथप्रभुः – सत्यनाथ का प्रभु, 770. सत्यनाथसंपत् – सत्यनाथ से संपत्ति देने वाले, 771. सत्यनाथमोचनः – सत्यनाथ से मोक्ष देने वाले, 772. सत्यनाथभूषणः – सत्यनाथ का आभूषण, 773. सत्यनाथसिद्धिः – सत्यनाथ से सिद्धि देने वाले, 774. सत्यनाथसुखप्रदः – सत्यनाथ से सुख देने वाले, 775. सत्यनाथमूर्तिः – सत्यनाथ रूप
श्लोक 99
त्रिनेत्रः त्रिनेत्रप्रभुः त्रिनेत्रसंपत् त्रिनेत्रमोचनः
त्रिनेत्रभूषणः त्रिनेत्रसिद्धिः त्रिनेत्रसुखप्रदः त्रिनेत्रमूर्तिः ॥
776.त्रिनेत्रः – तीन नेत्रों वाले 777. त्रिनेत्रप्रभुः – त्रिनेत्र का प्रभु 778. त्रिनेत्रसंपत् – त्रिनेत्र से संपत्ति देने वाले 779. त्रिनेत्रमोचनः – त्रिनेत्र से मोक्ष देने वाले 780. त्रिनेत्रभूषणः – त्रिनेत्र का आभूषण 781. त्रिनेत्रसिद्धिः – त्रिनेत्र से सिद्धि देने वाले 782. त्रिनेत्रसुखप्रदः – त्रिनेत्र से सुख देने वाले 783. त्रिनेत्रमूर्तिः – त्रिनेत्र रूप
श्लोक 100
नीलकण्ठः नीलकण्ठप्रभुः नीलकण्ठसंपत् नीलकण्ठमोचनः
नीलकण्ठभूषणः नीलकण्ठसिद्धिः नीलकण्ठसुखप्रदः नीलकण्ठमूर्तिः ॥
784.नीलकण्ठः – गले में नीला रत्न धारण करने वाले 785. नीलकण्ठप्रभुः – नीलकण्ठ का प्रभु 786. नीलकण्ठसंपत् – नीलकण्ठ से संपत्ति देने वाले 787. नीलकण्ठमोचनः – नीलकण्ठ से मोक्ष देने वाले 788. नीलकण्ठभूषणः – नीलकण्ठ का आभूषण 789. नीलकण्ठसिद्धिः – नीलकण्ठ से सिद्धि देने वाले 790. नीलकण्ठसुखप्रदः – नीलकण्ठ से सुख देने वाले 791. नीलकण्ठमूर्तिः – नीलकण्ठ रूप
श्लोक 101
महादेवः महादेवप्रभुः महादेवसंपत् महादेवमोचनः
महादेवभूषणः महादेवसिद्धिः महादेवसुखप्रदः महादेवं मूतिः ॥
792.महादेवः – महान देवता 793. महादेवप्रभुः – महादेव का प्रभु 794. महादेवसंपत् – महादेव से संपत्ति देने वाले 795. महादेवमोचनः – महादेव से मोक्ष देने वाले 796. महादेवभूषणः – महादेव का आभूषण 797. महादेवसिद्धिः – महादेव से सिद्धि देने वाले 798. महादेवसुखप्रदः – महादेव से सुख देने वाले 799. महादेवमूर्तिः – महादेव रूप
श्लोक 102
गंगाधरः गंगाधरप्रभुः गंगाधरसंपत् गंगाधरमोचनः
गंगाधरभूषणः गंगाधरसिद्धिः गंगाधरसुखप्रदः गंगाधरमूर्तिः ॥
800.गंगाधरः – गंगा को धारण करने वाले 801. गंगाधरप्रभुः – गंगाधर का प्रभु 802. गंगाधरसंपत् – गंगाधर से संपत्ति देने वाले 803. गंगाधरमोचनः – गंगाधर से मोक्ष देने वाले 804. गंगाधरभूषणः – गंगाधर का आभूषण 805. गंगाधरसिद्धिः – गंगाधर से सिद्धि देने वाले 806. गंगाधरसुखप्रदः – गंगाधर से सुख देने वाले 807. गंगाधरमूर्तिः – गंगाधर रूप
श्लोक 103
भूतनाथः भूतनाथप्रभुः भूतनाथसंपत् भूतनाथमोचनः
भूतनाथभूषणः भूतनाथसिद्धिः भूतनाथसुखप्रदः भूतनाथमूर्तिः ॥
808.भूतनाथः – भूतों के स्वामी 809. भूतनाथप्रभुः – भूतनाथ का प्रभु 810. भूतनाथसंपत् – भूतनाथ से संपत्ति देने वाले 811. भूतनाथमोचनः – भूतनाथ से मोक्ष देने वाले 812. भूतनाथभूषणः – भूतनाथ का आभूषण 813. भूतनाथसिद्धिः – भूतनाथ से सिद्धि देने वाले 814. भूतनाथसुखप्रदः – भूतनाथ से सुख देने वाले 815. भूतनाथमूर्तिः – भूतनाथ रूप
श्लोक 104
महाकालः महाकालप्रभुः महाकालसंपत् महाकालमोचनः
महाकालभूषणः महाकालसिद्धिः महाकालसुखप्रदः महाकालमूर्तिः ॥
816.महाकालः – समय और मृत्यु के स्वामी 817. महाकालप्रभुः – महाकाल का प्रभु 818. महाकालसंपत् – महाकाल से संपत्ति देने वाले 819. महाकालमोचनः – महाकाल से मोक्ष देने वाले 820. महाकालभूषणः – महाकाल का आभूषण 821. महाकालसिद्धिः – महाकाल से सिद्धि देने वाले 822. महाकालसुखप्रदः – महाकाल से सुख देने वाले 823. महाकालमूर्तिः – महाकाल रूप
श्लोक 105
रुद्रः रुद्रप्रभुः रुद्रसंपत् रुद्रमोचनः
रुद्रभूषणः रुद्रसिद्धिः रुद्रसुखप्रदः रुद्रमूर्तिः ॥
824.रुद्रः – भीषण और तेजस्वी 825. रुद्रप्रभुः – रुद्र का प्रभु 826. रुद्रसंपत् – रुद्र से संपत्ति देने वाले 827. रुद्रमोचनः – रुद्र से मोक्ष देने वाले 828. रुद्रभूषणः – रुद्र का आभूषण 829. रुद्रसिद्धिः – रुद्र से सिद्धि देने वाले 830. रुद्रसुखप्रदः – रुद्र से सुख देने वाले 831. रुद्रमूर्तिः – रुद्र रूप
श्लोक 106
नटराजः नटराजप्रभुः नटराजसंपत् नटराजमोचनः
नटराजभूषणः नटराजसिद्धिः नटराजसुखप्रदः नटराजमूर्तिः ॥
832.नटराजः – नृत्य के स्वामी 833. नटराजप्रभुः – नटराज का प्रभु 834. नटराजसंपत् – नटराज से संपत्ति देने वाले 835. नटराजमोचनः – नटराज से मोक्ष देने वाले 836. नटराजभूषणः – नटराज का आभूषण 837. नटराजसिद्धिः – नटराज से सिद्धि देने वाले 838. नटराजसुखप्रदः – नटराज से सुख देने वाले 839. नटराजमूर्तिः – नटराज रूप
श्लोक 107
वृषभवाहः वृषभवाहप्रभुः वृषभवाहसंपत् वृषभवाहमोचनः
वृषभवाहभूषणः वृषभवाहसिद्धिः वृषभवाहसुखप्रदः वृषभवाहमूर्तिः ॥
840.वृषभवाहः – वृषभ (बैल) पर सवार 841. वृषभवाहप्रभुः – वृषभवाह का प्रभु 842. वृषभवाहसंपत् – वृषभवाह से संपत्ति देने वाले 843. वृषभवाहमोचनः – वृषभवाह से मोक्ष देने वाले 844. वृषभवाहभूषणः – वृषभवाह का आभूषण 845. वृषभवाहसिद्धिः – वृषभवाह से सिद्धि देने वाले 846. वृषभवाहसुखप्रदः – वृषभवाह से सुख देने वाले 847. वृषभवाहमूर्तिः – वृषभवाह रूप
श्लोक 108
शिवः शिवप्रभुः शिवसंपत् शिवमोचनः
शिभूषणः शिवसिद्धिः शिवसुखप्रदः शिवमूर्तिः ॥
848.शिवः – शुभ और कल्याणकारी 849. शिवप्रभुः – शिव का प्रभु 850. शिवसंपत् – शिव से संपत्ति देने वाले 851. शिवमोचनः – शिव से मोक्ष देने वाले 852. शिवभूषणः – शिव का आभूषण 853. शिवसिद्धिः – शिव से सिद्धि देने वाले 854. शिवसुखप्रदः – शिव से सुख देने वाले 855. शिवमूर्तिः – शिव रूप
श्लोक 109
महाशिवः महाशिवप्रभुः महाशिवसंपत् महाशिवमोचनः
महाशिवभूषणः महाशिवसिद्धिः महाशिवसुखप्रदः महाशिवमूर्तिः ॥
856.महाशिवः – महान शिव 857. महाशिवप्रभुः – महाशिव का प्रभु 858. महाशिवसंपत् – महाशिव से संपत्ति देने वाले 859. महाशिवमोचनः – महाशिव से मोक्ष देने वाले 860. महाशिवभूषणः – महाशिव का आभूषण 861. महाशिवसिद्धिः – महाशिव से सिद्धि देने वाले 862. महाशिवसुखप्रदः – महाशिव से सुख देने वाले 863. महाशिवमूर्तिः – महाशिव रूप
श्लोक 110
विश्वनाथः विश्वनाथप्रभुः विश्वनाथसंपत् विश्वनाथमोचनः
विश्वनाथभूषणः विश्वनाथसिद्धिः विश्वनाथसुखप्रदः विश्वनाथमूर्तिः ॥
864.विश्वनाथः – सम्पूर्ण जगत के स्वामी 865. विश्वनाथप्रभुः – विश्वनाथ का प्रभु 866. विश्वनाथसंपत् – विश्वनाथ से संपत्ति देने वाले 867. विश्वनाथमोचनः – विश्वनाथ से मोक्ष देने वाले 868. विश्वनाथभूषणः – विश्वनाथ का आभूषण 869. विश्वनाथसिद्धिः – विश्वनाथ से सिद्धि देने वाले 870. विश्वनाथसुखप्रदः – विश्वनाथ से सुख देने वाले 871. विश्वनाथमूर्तिः – विश्वनाथ रूप
श्लोक 111
त्रैलोक्यनाथः त्रैलोक्यनाथप्रभुः त्रैलोक्यनाथसंपत् त्रैलोक्यनाथमोचनः
त्रैलोक्यनाथभूषणः त्रैलोक्यनाथसिद्धिः त्रैलोक्यनाथसुखप्रदः त्रैलोक्यनाथमूर्तिः ॥
872.त्रैलोक्यनाथः – तीनों लोकों के स्वामी 873. त्रैलोक्यनाथप्रभुः – त्रैलोक्यनाथ का प्रभु 874. त्रैलोक्यनाथसंपत् – त्रैलोक्यनाथ से संपत्ति देने वाले 875. त्रैलोक्यनाथमोचनः – त्रैलोक्यनाथ से मोक्ष देने वाले 876. त्रैलोक्यनाथभूषणः – त्रैलोक्यनाथ का आभूषण 877. त्रैलोक्यनाथसिद्धिः – त्रैलोक्यनाथ से सिद्धि देने वाले 878. त्रैलोक्यनाथसुखप्रदः – त्रैलोक्यनाथ से सुख देने वाले 879. त्रैलोक्यनाथमूर्तिः – त्रैलोक्यनाथ रूप
श्लोक 112
सच्चिदानन्दः सत्त्विकः सदाशिवः शिवोऽहम्
सत्यनाथः सुखदः शुद्धः शशिसंखः शुभः ॥
880.सच्चिदानन्दः – सत्य, चेतना और आनंद रूप 881. सत्त्विकः – सत्त्व गुण वाले 882. सदाशिवः – सदैव शिव स्वरूप 883. शिवोऽहम् – “मैं शिव हूँ” 884. सत्यनाथः – सत्य के स्वामी 885. सुखदः – सुख देने वाले 886. शुद्धः – पवित्र और शुद्ध 887. शशिसंखः – चंद्र और शंख धारण करने वाले 888. शुभः – शुभ और कल्याणकारी
श्लोक 113
महायोगी महात्मा महाबलः महाबुद्धिः
महातेजा महाशक्तिः महाप्रभुः महेश्वरः ॥
889.महायोगी – महान योगी 890. महात्मा – महान आत्मा 891. महाबलः – अति बलशाली 892. महाबुद्धिः – महान बुद्धि वाले 893. महातेजा – तेजस्वी 894. महाशक्तिः – असीम शक्ति वाले 895. महाप्रभुः – महान प्रभु 896. महेश्वरः – महाशिव, परमेश्वर
श्लोक 114
नागनाथः नागेश्वरः नागभूषणः नागमोचनः
नागसंपत् नागसिद्धिः नागसुखप्रदः नागमूर्ति ॥
897.नागनाथः – नागों के स्वामी 898. नागेश्वरः – नागों के ईश्वर 899. नागभूषणः – नाग का आभूषण 900. नागमोचनः – नागों से मोक्ष देने वाले 901. नागसंपत् – नागों से संपत्ति देने वाले 902. नागसिद्धिः – नागों से सिद्धि देने वाले 903. नागसुखप्रदः – नागों से सुख देने वाले 904. नागमूर्तिः – नाग रूप
श्लोक 115
चंद्रनाथः चंद्रशेखरः चंद्रभूषणः चंद्रमोचनः
चंद्रसंपत् चंद्रसिद्धिः चंद्रसुखप्रदः चंद्रमूर्ति ॥
905.चंद्रनाथः – चंद्रमा के स्वामी 906. चंद्रशेखरः – चंद्र का मुकुटधारी 907. चंद्रभूषणः – चंद्र का आभूषण 908. चंद्रमोचनः – चंद्र से मोक्ष देने वाले 909. चंद्रसंपत् – चंद्र से संपत्ति देने वाले 910. चंद्रसिद्धिः – चंद्र से सिद्धि देने वाले 911. चंद्रसुखप्रदः – चंद्र से सुख देने वाले 912. चंद्रमूर्तिः – चंद्र रूप
श्लोक 116
त्रिनेत्रः त्रिनेत्रप्रभुः त्रिनेत्रसंपत् त्रिनेत्रमोचनः
त्रिनेत्रभूषणः त्रिनेत्रसिद्धिः त्रिनेत्रसुखप्रदः त्रिनेत्रमूर्ति ॥
913.त्रिनेत्रः – तीन आँखों वाले 914. त्रिनेत्रप्रभुः – त्रिनेत्र का प्रभु 915. त्रिनेत्रसंपत् – त्रिनेत्र से संपत्ति देने वाले 916. त्रिनेत्रमोचनः – त्रिनेत्र से मोक्ष देने वाले 917. त्रिनेत्रभूषणः – त्रिनेत्र का आभूषण 918. त्रिनेत्रसिद्धिः – त्रिनेत्र से सिद्धि देने वाले 919. त्रिनेत्रसुखप्रदः – त्रिनेत्र से सुख देने वाले 920. त्रिनेत्रमूर्तिः – त्रिनेत्र रूप
श्लोक 117
महाशिवाय महेश्वराय महायोगेश्वराय
महाकालाय महादेवाय शिवाय नमः ॥
921.महाशिवाय – महान शिव को समर्पित 922. महेश्वराय – परमेश्वर को समर्पित 923. महायोगेश्वराय – योग के स्वामी 924. महाकालाय – समय और मृत्यु के स्वामी 925. महादेवाय – महान देव 926. शिवाय – शिव स्वरूप
श्लोक 118
अर्धनारीश्वराय अघोराय अन्नपूर्णाय
वृषभवाहनाय त्रैलोक्यनाथाय महाशिवाय ॥
927.अर्धनारीश्वराय – पार्वती के साथ ईश्वर 928. अघोराय – भयकारी रूप वाले 929. अन्नपूर्णाय – अन्न देने वाले 930. वृषभवाहनाय – बैल पर सवार 931. त्रैलोक्यनाथाय – तीनों लोकों के स्वामी 932. महाशिवाय – महान शिव
श्लोक 119
विश्वनाथाय सच्चिदानन्दाय सत्त्विकाय
सदाशिवाय शिवोऽहम् सत्यनाथाय सुखदाय ॥
933.विश्वनाथाय – सम्पूर्ण जगत के स्वामी 934. सच्चिदानन्दाय – सत्य, चेतना और आनंद रूप 935. सत्त्विकाय – सत्त्व गुण वाले 936. सदाशिवाय – सदैव शिव स्वरूप 937. शिवोऽहम् – “मैं शिव हूँ” 938. सत्यनाथाय – सत्य के स्वामी 939. सुखदाय – सुख देने वाले
श्लोक 120
शुद्धाय शशिसंखाय शुभाय नागनाथाय
नागेश्वराय नागभूषणाय नागमोचनाय ॥
940.शुद्धाय – पवित्र और शुद्ध 941. शशिसंखाय – चंद्र और शंख धारण करने वाले 942. शुभाय – शुभ और कल्याणकारी 943. नागनाथाय – नागों के स्वामी 944. नागेश्वराय – नागों के ईश्वर 945. नागभूषणाय – नाग का आभूषण 946. नागमोचनाय – नागों से मोक्ष देने वाले
श्लोक 121
चंद्रनाथाय चंद्रशेखराय चंद्रभूषणाय
चंद्रमोचनाय चंद्रसंपत् चंद्रसिद्ध्यै चन्द्रसुखप्रदाय ॥
947.चंद्रनाथाय – चंद्रमा के स्वामी 948. चंद्रशेखराय – चंद्र का मुकुटधारी 949. चंद्रभूषणाय – चंद्र का आभूषण 950. चंद्रमोचनाय – चंद्र से मोक्ष देने वाले 951. चंद्रसंपत् – चंद्र से संपत्ति देने वाले 952. चंद्रसिद्ध्यै – चंद्र से सिद्धि देने वाले 953. चंद्रसुखप्रदाय – चंद्र से सुख देने वाले
श्लोक 122
त्रिनेत्राय त्रिनेत्रप्रभवे त्रिनेत्रसंपत्
त्रिनेत्रमोचनाय त्रिनेत्रभूषणाय त्रिनेत्रसिद्ध्यै त्रिनेत्रसुखप्रदाय ॥
954.त्रिनेत्राय – तीन आँखों वाले 955. त्रिनेत्रप्रभवे – त्रिनेत्र का प्रभु 956. त्रिनेत्रसंपत् – त्रिनेत्र से संपत्ति देने वाले 957. त्रिनेत्रमोचनाय – त्रिनेत्र से मोक्ष देने वाले 958. त्रिनेत्रभूषणाय – त्रिनेत्र का आभूषण 959. त्रिनेत्रसिद्ध्यै – त्रिनेत्र से सिद्धि देने वाले 960. त्रिनेत्रसुखप्रदाय – त्रिनेत्र से सुख देने वाले
श्लोक 123
महाशिवाय महेश्वराय महायोगेश्वराय
महाकालाय महादेवाय शिवाय नमोऽस्तु ॥
961.महाशिवाय – महान शिव 962. महेश्वराय – परमेश्वर 963. महायोगेश्वराय – योग के स्वामी 964. महाकालाय – समय और मृत्यु के स्वामी 965. महादेवाय – महान देव 966. शिवाय – शिव स्वरूप 967. नमोऽस्तु – नमस्कार
श्लोक 124
ॐ अर्द्धनारीश्वराय त्रैलोक्यनाथाय नमः
969अर्द्धनारीश्वराय – “पार्वती के साथ ईश्वर” (जो पुरुष और स्त्री रूप में सम्पूर्ण ब्रह्मांड में प्रतिष्ठित हैं) 970. त्रैलोक्यनाथाय – “तीनों लोकों के स्वामी” (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल के रक्षक और पालनहार)
श्लोक 125
ॐ विश्वनाथाय भूतनाथाय नमः
971.विश्वनाथाय – “संपूर्ण जगत के स्वामी” 972. भूतनाथाय – “सभी जीवों और भूतों के अधिपति”
श्लोक 126
ॐ महाशक्तये महायोगिनः नमः
973.महाशक्तये – “सर्वशक्तिमान” 974. महायोगिनः – “महान योगी, योग के पालनहार”
श्लोक 127
ॐ शूलपाणये गंगाधराय नमः
975.शूलपाणये – “त्रिशूलधारी, सर्वशक्तिशाली” 976. गंगाधराय – “गंगा के धारक, निर्मलता और पवित्रता के प्रतीक”
श्लोक 128
ॐ रूद्राय रत्नाकराय नमः
976.रूद्राय – “भीषण रूप वाले रुद्र” 978. रत्नाकराय – “अमूल्य रत्नों के संरक्षक”
श्लोक 129
ॐ भस्मांगराय चन्द्रशेखराय नमः
979.भस्मांगराय – “भस्म धारण करने वाले, मोक्ष देने वाले”980. चन्द्रशेखराय – “शिव जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है”
श्लोक 130
ॐ कैलासपति नटराजाय नमः
981.कैलासपति – “कैलाश पर्वत के अधिपति”982. नटराजाय – “सर्वश्रेष्ठ नर्तक, सृष्टि के संहारक और पालनहार”
श्लोक 131
ॐ पंचवक्त्राय त्रिनेत्राय नमः
983.पंचवक्त्राय – “पांच मुखों वाले, सर्वज्ञान स्वरूप”984. त्रिनेत्राय – “तीन नेत्रों वाले, समय और सत्य के ज्ञाता”
श्लोक 132
ॐ भूतपातिनाय शंभवे नमः
985.भूतपातिनाय – “सभी प्राणियों और भूतों के स्वामी”986. शंभवे – “संपूर्ण जगत को कल्याण देने वाले”
श्लोक 133
ॐ करालाय भैरवाय नमः
987.करालाय – “भीषण रूप वाले, भय दूर करने वाले”988. भैरवाय – “सर्वशक्तिशाली और संहारक स्वरूप”
श्लोक 134
ॐ त्रिपुरान्तकाय महेश्वराय नमः
989.त्रिपुरान्तकाय – “त्रिपुरासुर का संहार करने वाले”990. महेश्वराय – “महान स्वामी, सर्वोच्च देव”
श्लोक 135
ॐ धूम्रवर्णाय रुद्राय नमः
991.धूम्रवर्णाय – “धूसर रूप वाले, शांत और भीषण स्वरूप”992. रुद्राय – “सभी प्रलयकारी रूपों के अधिपति”
श्लोक 136
ॐ चिदानन्दाय सदाशिवाय नमः
993.चिदानन्दाय – “सत्य, चेतना और आनंद स्वरूप”994. सदाशिवाय – “सदैव कल्याणकारी शिव स्वरूप”
श्लोक 137
ॐ जटाधराय महाकालाय नमः
995.जटाधराय – “जटा धारण करने वाले, शांत और अचंचल” 996. महाकालाय – “समय और मृत्यु के स्वामी”
श्लोक 138
ॐ वृषभवाहनाय भूतनाथाय नमः
997.वृषभवाहनाय – “वृषभ (बैल) पर सवार” 998. भूतनाथाय – “सभी प्राणियों और भूतों के स्वामी”
श्लोक 139
ॐ पार्वतीपतये महादेवाय नमः
999.पार्वतीपतये – “पार्वती के पति, स्नेह और शक्ति के स्रोत” 1000. महादेवाय – “महान देव, सभी देवों के स्वामी”
श्लोक 140
ॐ वृषध्वजाय रुद्राय नमः
1001वृषध्वजाय – “बैल ध्वज धारण करने वाले”1002. रुद्राय – “सभी संहार और प्रलय के रूपों के स्वामी”
श्लोक 141
ॐ कैलासनाथाय महेश्वराय नमः
1003.कैलासनाथाय – “कैलाश पर्वत के स्वामी” 1004. महेश्वराय – “सर्वशक्तिमान और महान स्वामी”
श्लोक 142
ॐ अन्नपूर्णायै नमोऽस्तु
1005.अन्नपूर्णायै – “अन्न देने वाली, समृद्धि देने वाली”
श्लोक 143
ॐ त्रैलोक्यनाथाय नमः
1006.त्रैलोक्यनाथाय – “तीनों लोकों के स्वामी”
श्लोक 144
ॐ शूलपाणये नमः
1007.शूलपाणये – “त्रिशूलधारी, दोष और पाप नाश करने वाले”
श्लोक 145
ॐ शिवाय नमः
1008.शिवाय – “कल्याणकारी, सबके प्रति दयालु और शिव स्वरूप”



