
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। जब यह पूर्णिमा अधिक मास में आती है, तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास में अधिक मास पड़ रहा है, इसलिए इस बार “ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा” का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन स्नान, दान, व्रत, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 कब है?
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 31 मई, रविवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 30 मई की रात से प्रारंभ होकर 31 मई तक रहेगी।
पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 मई 2026, रात्रि 09:18 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 मई 2026, रात्रि 11:05 बजे
- स्नान-दान का शुभ समय: प्रातः 05:30 से 08:15 बजे तक
- सत्यनारायण पूजा मुहूर्त: शाम 06:15 से 08:30 बजे तक
अधिक मास क्या होता है?
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग में हर 32 या 33 महीने बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है ताकि सौर और चंद्र कैलेंडर के बीच संतुलन बना रहे। धार्मिक दृष्टि से यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और व्रत करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है।
- सत्यनारायण कथा सुनने और कराने से घर में सुख-शांति आती है।
- पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
- मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूजा विधि
1. प्रातः स्नान करें
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
2. व्रत का संकल्प लें
भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
3. पूजा सामग्री तैयार करें
- पीले वस्त्र
- तुलसी दल
- चंदन
- फल और मिठाई
- दीपक
- धूप
- पंचामृत
4. भगवान विष्णु की पूजा करें
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिपूर्वक पूजन करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
5. सत्यनारायण कथा पढ़ें
शाम के समय सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना और प्रसाद वितरण करना शुभ माना जाता है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर क्या दान करें?
इस दिन दान का विशेष महत्व होता है। विशेष रूप से निम्न वस्तुओं का दान शुभ माना गया है:
- जल से भरा घड़ा
- वस्त्र
- चावल
- चीनी
- सत्तू
- छाता
- जूते-चप्पल
- फल
दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा से जुड़े उपाय
आर्थिक समृद्धि के लिए
पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं।
मानसिक शांति के लिए
चंद्रमा को दूध मिश्रित जल अर्पित करें।
विवाह और सुखी दांपत्य के लिए
विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करें।
निष्कर्ष
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 आध्यात्मिक उन्नति, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यदि आप इस पावन दिन व्रत, स्नान, दान और सत्यनारायण कथा करते हैं, तो आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति हो सकती है।



