
हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व माना जाता है। जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस दिन को संक्रांति कहा जाता है। वर्ष 2026 में मिथुन संक्रांति 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे सौर मास का परिवर्तन होगा।
मिथुन संक्रांति को सूर्य उपासना, स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से ओडिशा में यह पर्व “राजा पर्व” के आरंभ का प्रतीक माना जाता है।
मिथुन संक्रांति 2026 कब है?
| विवरण | जानकारी |
| पर्व | मिथुन संक्रांति |
| तिथि | 15 जून 2026, सोमवार |
| सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश | लगभग दोपहर 12:58 बजे |
| पुण्य काल | दोपहर 12:59 बजे से शाम 7:20 बजे तक |
| महा पुण्य काल | दोपहर 12:59 बजे से 3:19 बजे तक |
मिथुन संक्रांति क्या है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, तब मिथुन संक्रांति मनाई जाती है। यह राशि बुध ग्रह द्वारा संचालित होती है और बुद्धि, संचार, ज्ञान तथा नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।
संक्रांति के समय सूर्य की ऊर्जा में परिवर्तन माना जाता है, इसलिए इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है।
मिथुन संक्रांति का धार्मिक महत्व
1. सूर्य उपासना का विशेष दिन
मिथुन संक्रांति सूर्य देव को समर्पित है। इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
2. पुण्य और दान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, दान, जप और तप करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है। विशेष रूप से अन्न, वस्त्र, जल, फल और गुड़ का दान शुभ माना जाता है।
3. पितरों का आशीर्वाद
मिथुन संक्रांति पर तर्पण और पितृ स्मरण करने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
4. वर्षा ऋतु का स्वागत
यह संक्रांति ग्रीष्म ऋतु के अंत और वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत भी मानी जाती है। किसानों के लिए यह समय विशेष महत्व रखता है क्योंकि खेती-बाड़ी की नई तैयारियाँ शुरू होती हैं।
मिथुन संक्रांति पूजा विधि
प्रातःकालीन स्नान
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
- किसी नदी, तालाब या घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
सूर्य देव को अर्घ्य दें
- तांबे के लोटे में जल भरें।
- उसमें लाल पुष्प, रोली और अक्षत डालें।
- उगते सूर्य को जल अर्पित करें।
मंत्र जाप
निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें:
ॐ घृणि सूर्याय नमः
दान करें
- गेहूं
- गुड़
- लाल वस्त्र
- तांबे के पात्र
- जल से भरा घड़ा
का दान करना शुभ माना जाता है।
मिथुन संक्रांति पर क्या करें?
- सूर्य देव की पूजा करें।
- गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान दें।
- गाय को हरा चारा खिलाएं।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
- पितरों के लिए तर्पण करें।
- जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
मिथुन संक्रांति पर क्या नहीं करना चाहिए?
- क्रोध और विवाद से बचें।
- किसी का अपमान न करें।
- तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- नशे और बुरी आदतों से दूर रहें।
- दान-पुण्य की उपेक्षा न करें।
ओडिशा में मिथुन संक्रांति का विशेष महत्व
ओडिशा में मिथुन संक्रांति को “राजा पर्व” के आरंभ के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान पृथ्वी माता का सम्मान किया जाता है। महिलाएं और युवतियां झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और विशेष व्यंजन तैयार किए जाते हैं। यह पर्व प्रकृति और नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
मिथुन संक्रांति के लाभ
- सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।
- आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि होती है।
- मानसिक स्पष्टता और निर्णय क्षमता बढ़ती है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
- पितृ दोषों के प्रभाव में कमी आती है।
मिथुन संक्रांति 2026, 15 जून को मनाई जाएगी। यह दिन सूर्य देव की आराधना, स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। सूर्य उपासना के साथ दान-पुण्य और सद्कर्म करने से विशेष फल प्राप्त होता है।



