
तुलसी पूजा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। तुलसी माता को देवी लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। प्रतिदिन तुलसी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं।
25 दिसंबर, 2025 को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 08:00 बजे से 10:00 बजे तक रहेगा। वहीं, शाम का पूजन मुहूर्त शाम 05:30 बजे से 07:00 बजे तक रहेगा।
तुलसी पूजा का धार्मिक महत्व
तुलसी माता की पूजा से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहाँ नकारात्मक शक्तियाँ प्रवेश नहीं कर पातीं। तुलसी पूजा करने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तुलसी पूजा से जुड़ी मान्यताएँ
- रविवार और एकादशी को तुलसी दल न तोड़ें
- तुलसी विवाह से जीवन में वैवाहिक सुख बढ़ता है
- तुलसी के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है
तुलसी पूजा की विधि
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- तुलसी पौधे को स्वच्छ जल से स्नान कराएँ
- दीपक जलाएँ और पुष्प अर्पित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- तुलसी माता की आरती करें
तुलसी पूजा के लाभ
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
- घर में सुख-समृद्धि का वास
- रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
- वास्तु दोषों का निवारण
- भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति
तुलसी पूजा क्यों अनिवार्य मानी जाती है?
- बिना तुलसी के विष्णु भोग अधूरा
- तुलसी पूजन से पितृ दोष शांत होता है
- घर के वास्तु दोष दूर होते हैं
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है
- रोग और दरिद्रता से रक्षा होती है
घर में तुलसी सूख जाए तो क्या करें?
धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि तुलसी पौधा सूख जाए तो उसे बहते जल में प्रवाहित करें या किसी पवित्र स्थान पर मिट्टी में विसर्जित करें। इसके बाद विधि-विधान से नई तुलसी लगाएँ।
तुलसी के प्रकार और उनका महत्व
- राम तुलसी – मानसिक शांति के लिए
- श्याम तुलसी – आध्यात्मिक उन्नति के लिए
- वन तुलसी – औषधीय उपयोग में श्रेष्ठ



