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Ganga Saptami | गंगा सप्तमी: जाने इस दिन पवित्र गंगा नदी का आशीर्वाद कैसे प्राप्त करें? | PDF

Ganga Saptami

23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। यह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो पवित्र गंगा नदी को समर्पित है।

गंगा सप्तमी का शुभ मुहूर्त:

  • स्नान का मुहूर्त: सुबह सूर्योदय के समय (ब्रह्म मुहूर्त)।
  • पूजा का मुहूर्त: सुबह 10:58 से दोपहर 01:38 के बीच।

गंगा सप्तमी का महत्व:

  • गंगा नदी का जन्म: इस दिन माना जाता है कि देवी गंगा ने भगवान विष्णु के चरणों से प्रकट होकर पृथ्वी पर अवतार लिया था।
  • पापों का नाश: गंगा नदी को मोक्षदायिनी माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • सुख-समृद्धि: इस दिन गंगा नदी की पूजा करने और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
  • नए कार्यों की शुरुआत: इस को किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।

गंगा सप्तमी की पूजा विधि:

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा की थाल तैयार करें। इसमें फल, फूल, धूप, दीप, दूर्वा और गंगाजल रखें।
  • गंगा नदी के किनारे जाएं।
  • गंगा नदी को अर्घ्य दें।
  • ॐ गंगे नमः” मंत्र का जाप करें।
  • गंगा नदी में स्नान करें।
  • दान-पुण्य करें।
  • आरती करें।

गंगा सप्तमी के व्रत नियम:

  • इस दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखा जाता है।
  • सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
  • दिन भर भगवान विष्णु और देवी गंगा का ध्यान करें।
  • नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

गंगा सप्तमी के उपाय :

  • इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें। पीपल का पेड़ भगवान विष्णु को प्रिय माना जाता है।
  • गंगा के किनारे गाय को हरा चारा खिलाएं।
  • गरीबों को भोजन दान करें।

गंगा सप्तमी का पर्व हमें गंगा नदी के महत्व के बारे में याद दिलाता है। इस दिन गंगा नदी की पूजा करने और दान-पुण्य करने से हमें गंगा नदी का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

गंगा सप्तमी की कथा (Story of Ganga Saptami):

पौराणिक कथा के अनुसार, महाराजा भागीरथ अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए स्वर्ग से गंगा नदी को पृथ्वी पर लाना चाहते थे। उन्होंने कठोर तपस्या की, जिससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने गंगा नदी को अपने जटाजूट में धारण कर लिया। भागीरथ की कठिन तपस्या से देवी गंगा भगवान शिव के जटाजूट से पृथ्वी पर अवतरित हुईं। गंगा सप्तमी के दिन ही देवी गंगा पृथ्वी पर आई थीं।

गंगा सप्तमी की शुभकामनाएं !

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