अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 61 संस्कृत श्लोक तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्पर: | वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य…
संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म का एक पवित्र व्रत है जिसे भगवान गणेश को समर्पित किया गया है। इसे प्रत्येक चंद्र…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 60 संस्कृत श्लोक यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चित: | इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मन:…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 59 संस्कृत श्लोक विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः | रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ||…
Buddha Purnima बुद्ध पूर्णिमा भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का पवित्र अवसर है, जिसे बौद्ध धर्म…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 58 यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः | इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता || 58|| सरल हिंदी…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 57 यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् | नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता || 57|| सरल…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 56 दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः | वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते || 56|| सरल हिंदी में भावार्थ हे…
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, जिनमें से प्रत्येक का…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 55 श्रीभगवानुवाच | प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् | आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते || 55|| सरल…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 54 अर्जुन उवाच | स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव | स्थितधी: किं प्रभाषेत किमासीत…
अध्याय 2 – सांख्य योग श्लोक 53 श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला | समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि || 53|| सरल हिंदी…
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