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कब, क्यों और कैसे करें सूर्य देव की पूजा और इसका प्रमुख स्थल | Vivsvat Saptami 2024 | PDF

Vivsvat Saptami 2024

विवस्वत सप्तमी एक हिंदू त्योहार है जो इस वर्ष 12 जुलाई 2024 शुक्रवार को मनाया जाएगा । जो सूर्य देवता की पूजा के लिए समर्पित है। इसे सूर्य सप्तमी या रथ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। यह माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन को सूर्य देव के रथ के प्रतीकात्मक परिवर्तन और उनके उत्तरायण यात्रा की शुरुआत के रूप में माना जाता है।

विवस्वत सप्तमी के दिन, भक्त सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं और सूर्य देवता को अर्घ्य (जल अर्पण) देते हैं। इसके बाद वे सूर्य देवता की पूजा करते हैं और उन्हें फूल, चावल, जल और दीपक अर्पित करते हैं। इस दिन सूर्य मंत्रों का जाप और सूर्य देवता की आरती करना शुभ माना जाता है। इस व्रत को करने से स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

प्रमुख स्थल और उनके धार्मिक महत्व:

विवस्वत सप्तमी, जिसे रथ सप्तमी या सूर्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन इसे विशेष रूप से निम्नलिखित स्थानों पर बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है:

  1. उत्तर प्रदेश: विशेष रूप से वाराणसी और प्रयागराज में, विवस्वत सप्तमी का उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ के लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं और सूर्य देवता की पूजा करते हैं।
  2. महाराष्ट्र: यहाँ के लोग सूर्य देवता को अर्घ्य देते हैं और विशेष पूजा अर्चना करते हैं। महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में यह त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
  3. राजस्थान: जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों में विवस्वत सप्तमी का विशेष महत्व है। यहाँ के लोग सूर्य मंदिरों में पूजा करते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
  4. तमिलनाडु: दक्षिण भारत में विशेष रूप से तमिलनाडु में, रथ सप्तमी को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ के लोग सूर्य देवता की आराधना करते हैं और उनके नाम पर विभिन्न धार्मिक गतिविधियाँ आयोजित करते हैं।
  5. आंध्र प्रदेश: यहाँ रथ सप्तमी को ‘रथ सप्तमी' या ‘सूर्य जयंती‘ के रूप में मनाया जाता है। तिरुपति के प्रसिद्ध मंदिर में इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान होते हैं।

Vivsvat Saptami image

विवस्वत सप्तमी  के दिन करे ये कार्य:

  1. स्नान: सूर्योदय से पहले पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही स्नान किया जाता है। स्नान के पानी में तिल मिलाने का भी महत्व है।
  2. सूर्य को अर्घ्य देना: स्नान के बाद, तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत (चावल) मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
  3. सूर्य पूजा: सूर्य देवता की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक, धूप, फूल और नैवेद्य अर्पित करके उनकी पूजा की जाती है। सूर्य मंत्रों का जप और सूर्य अष्टक का पाठ भी किया जाता है।
  4. दान-पुण्य: विवस्वत सप्तमी के दिन तिल, गुड़, कपड़े, अन्न और दक्षिणा दान करने का विशेष महत्व है। इससे पुण्य प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है।
  5. विशेष भोजन: इस दिन व्रत रखने के बाद विशेष भोजन तैयार किया जाता है, जिसमें सात प्रकार की सब्जियाँ और अनाज शामिल होते हैं। व्रतधारी फलाहार भी कर सकते हैं।
  6. सूर्य नमस्कार: योग और सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में लाभ होता है।
  7. धार्मिक अनुष्ठान: विवस्वत सप्तमी के दिन कथा सुनना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और भगवान सूर्य की आरती करना शुभ माना जाता है।

विवस्वत सप्तमी के दिन इन कार्यो से बचे:

  1. नकारात्मक विचार और क्रोध: इस दिन नकारात्मक विचारों और क्रोध से बचना चाहिए। मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखना चाहिए।
  2. अशुद्धता: किसी भी प्रकार की अशुद्धता से बचना चाहिए, जैसे गंदे कपड़े पहनना, साफ-सफाई का ध्यान न रखना आदि। शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  3. भारी भोजन: तामसिक और भारी भोजन से परहेज करना चाहिए। व्रत का पालन करते हुए हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए।
  4. झूठ बोलना और छल-कपट करना: इस दिन झूठ बोलना, धोखा देना या किसी को हानि पहुँचाना निषेध है।
  5. अल्कोहल और नशे का सेवन: इस दिन किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। यह व्रत और पूजा को अशुद्ध कर सकता है।
  6. मांसाहार का सेवन: विवस्वत सप्तमी के दिन मांसाहार से पूरी तरह बचना चाहिए। शाकाहारी भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
  7. अधार्मिक कार्य: किसी भी प्रकार के अधार्मिक कार्यों, जैसे चोरी, हिंसा, और अन्य अनुचित गतिविधियों से बचना चाहिए।
  8. आलस्य: आलस्य और सुस्ती से बचना चाहिए। इस दिन सक्रिय रहकर पूजा, दान और धार्मिक कार्यों में संलग्न रहना चाहिए।

सूर्यदेव की पूजा के सही तरीक़े:

  1. प्रातःकाल स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही स्नान करें।स्नान के पानी में तिल मिलाना शुभ माना जाता है।
  2. सूर्य को अर्घ्य देना: स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत (चावल) मिलाएँ।सूर्य देव के सामने खड़े होकर जल को अर्घ्य दें। जल अर्पित करते समय मंत्र का जाप करें।
    “ॐ सूर्याय नमः”
  3. सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र की स्थापना: घर के पूजा स्थल पर सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।प्रतिमा या चित्र को जल से शुद्ध करें और उस पर लाल वस्त्र अर्पित करें।
  4. दीपक और धूप जलाना: सूर्य देव के सामने दीपक और धूप जलाएँ।धूप और दीपक को सूर्य देव को अर्पित करें।
  5. पुष्प अर्पण: सूर्य देव को लाल फूल अर्पित करें।तुलसी के पत्ते भी अर्पित कर सकते हैं।
  6. नैवेद्य अर्पण: सूर्य देव को नैवेद्य (फल, मिठाई, गुड़ आदि) अर्पित करें।तिल और गुड़ से बनी मिठाई का विशेष महत्व है।
  7. सूर्य मंत्रों का जाप:
    “ॐ सूर्याय नमः”
    “ॐ आदित्याय नमः”
    “ॐ भास्कराय नमः”
    आदि मंत्रों का जाप करें।सूर्य अष्टक या सूर्य सहस्त्रनाम का पाठ करें।
  8. सूर्य देव की आरती: सूर्य देव की आरती करें और आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।आरती करते समय “ॐ जय जगदीश हरे” या “ॐ जय सूर्य भगवान” गा सकते हैं।
  9. ध्यान और प्रार्थना: सूर्य देव का ध्यान करें और प्रार्थना करें।उनके चरणों में समर्पण और श्रद्धा व्यक्त करें।
  10. दान-पुण्य: तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें।गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करें।
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